कोरबा में अमृतकाल की चमक अधूरी, ठीहाईभाटा के ग्रामीण ढोढ़ी का पानी पीने को मजबूर

कोरबा। स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे होने पर भारतवर्ष अमृतकाल मना रहा है। हर सेक्टर में अच्छे कार्य करने के साथ लोगों को सुविधाएं दी जा रही है और समस्याओं से मुक्त किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जल संपदा के मामले में समृद्ध कहे जाने वाले कोरबा जिले में शहर के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में जल जीवन की छत्र छाया बनी हुई है वहीं ठीहाईभाटा के गांव के लोग इस गर्मी में भी ढोढ़ी का पानी पीने को मजबूर हैं क्योंकि यही उनका सहारा है।


सरकार द्वारा चलाई जा रही विकास योजनाएं और प्रशासन के दावों की हकीकत जब जमीनी स्तर पर देखी जाती है, तो कई बार एक अलग ही तस्वीर सामने आती है।

कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़़ा विकासखंड के ग्राम पंचायत रेंगनिया के आश्रित ग्राम ठीहाईभाटा की स्थिति इसका जीता-जागता उदाहरण है।आज भी इस वनांचल क्षेत्र के ग्रामीण ढोढ़ी (जलस्रोत) का गंदा और असुरक्षित पानी पीने को मजबूर हैं।

यहां के लिए जल जीवन मिशन केवल एक सपना बनकर रह गई है। पानी ही नहीं, ठीहाईभाटा गांव के निवासी आज भी आंगनबाड़ी, प्राथमिक स्कूल, बिजली और सडक़ जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गांव तक पक्की सडक़ न होने के कारण एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती, जिससे बीमार या घायल व्यक्तियों को ग्रामीण खाट या झलंगी पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाते हैं। यह एक भयावह स्थिति है, जो किसी भी आपातकालीन परिस्थिति को और भी गंभीर बना सकती है।