ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्राधिकारी का किया घेराव

कोलगा के कैलाश गुफा मार्ग स्थित जंगल में किए जा रहे कूप कटिंग काम को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। काम बंद कराने के बाद ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्राधिकारी घेराव कर दिया। बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीण अधिकारियों को हटाने की मांग पर अड़े रहे।

कोरबा वनमंडल के वन परिक्षेत्र पसरखेत में 21 नवंबर को सलेक्शन कम इम्प्रुवमेंट (एसीआई) के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित था। यह कार्यक्रम कक्ष क्रमांक 1128 में चल रहा था। कार्यक्रम में सीसीएफ प्रभात मिश्रा व डीएफओ अरविंद पीएम सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे।

उनकी मौजूदगी में मौके पर पहुंचे कोलगा के ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर विरोध जता दिया था। इस दौरान ग्रामीणों ने जंगल को कोलगा समिति का बताते हुए कूप कटिंग पर रोक लगाने की मांग की थी। ग्रामीणों के विरोध के बाद वार्ता का दौर चलता रहा। इसके बाद भी बात नही बनी। वन विभाग ने सप्ताह भर पहले कैलाश गुफा मार्ग स्थित जंगल में कूप कटिंग का काम शुरू करा दिया था।

इसके लिए पसरखेत के मजदूर लगाए गए थे, जो कुल्हाड़ी सहित अन्य औजार की मदद से पेड़ की कटाई कर रहे थे। जिसकी भनक कोलगा के ग्रामीणों को लग गई। ग्रामीण पेड़ कटाई के विरोध में लामबंद हो गए। महिला समिति के सदस्य भारी संख्या में एकत्रित हुई। वे लाठी डंडे से लैस होकर मौके पर जा पहुंचे। महिलाओं ने पेड़ कटाई का विरोध शुरू कर काम बंद करा दिया था।

शुक्रवार को पुनः ग्रामीणों ने पसरखेत रेंज आफिस का घेराव कर प्रदर्शन किया। कूप कटिंग का विरोध करते हुए वे अधिकारियों को अन्यत्र हटाने की मांग करते रहे।

कूप कटिंग को लेकर एक तरफ जहां विवाद की स्थिति बनी हुई है। वहीं अधिकारियों को हटाने की मांग भी हो रही है, लेकिन इस मामले में अधिकारियों को हटाना हल नहीं हो सकता। नए अधिकारी भी विभागीय आदेश के तहत कार्य को आगे बढ़ाएंगे ही। बताया जा रहा है कि वर्षों पहले कोलगा समिति में करीब दो दर्जन कक्ष समाहित थे।

विभाग द्वारा तराईमार को कोलगा से पृथक कर नए समिति का गठन किया गया। जिससे करीब डेढ़ दर्जन कंपार्टमेंट तराईमार समिति में चला गया। तत्कालिन अधिकारियों द्वारा समिति विभाजन को लेकर ग्रामीणों को विश्वास में नहीं लिया गया था। जिसके चलते विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है।