मोर के प्राकृतिक आवास और पुराने कब्रिस्तान को मिट्टी से पाटने का आरोप

एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन और आरकेटीसी कंपनी पर उठे सवाल, लोक जनशक्ति पार्टी ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की

कोरबा।एसईसीएल के कुसमुंडा क्षेत्र में राष्ट्रीय पक्षी मोर के प्राकृतिक आवास और पुराने कब्रिस्तान को कथित रूप से नुकसान पहुंचाकर वहां आवासीय कॉलोनी विकसित किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन और अनुबंधित कंपनी आरकेटीसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पार्टी के कोरबा जिलाध्यक्ष राजकुमार दुबे ने कलेक्टर, वनमंडलाधिकारी और पर्यावरण संरक्षण मंडल के कोरबा स्थित उप क्षेत्रीय अधिकारी को शिकायत सौंपकर मामले की जांच तथा जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

शिकायत में बताया गया है कि कुसमुंडा क्षेत्र के ग्राम बरमपुर के समीप स्थित ओवरबर्डन डंप क्षेत्र में कई वर्षों पहले पौधारोपण किया गया था। समय के साथ यह क्षेत्र घने जंगल के रूप में विकसित हो गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस जंगल में बड़ी संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोर विचरण करते हैं और यह उनका प्राकृतिक आवास बन चुका है।

आरोप है कि इसके बावजूद एसईसीएल प्रबंधन और ठेका कंपनी आरकेटीसी द्वारा भारी मशीनों, पोकलेन और डोजर की मदद से हरे-भरे क्षेत्र को समतल किया जा रहा है। पेड़ों की कटाई और जमीन के समतलीकरण से मोरों के प्राकृतिक आवास पर खतरा उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है।

मामले का दूसरा पहलू धार्मिक और सामाजिक भावनाओं से जुड़ा है। शिकायत पत्र के अनुसार, जिस स्थान पर कथित तौर पर आवासीय कॉलोनी विकसित की जा रही है, वहां वर्षों पुराना कब्रिस्तान भी स्थित है। आरोप लगाया गया है कि निर्माण एवं समतलीकरण कार्य के दौरान कब्रिस्तान की जमीन पर मिट्टी डाल दी गई, जिससे कई पुरानी कब्रें मिट्टी में दब गई हैं। इससे स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होने और क्षेत्र में नाराजगी बढ़ने की बात कही गई है।

निष्पक्ष जांच और निर्माण कार्य पर रोक की मांग
लोक जनशक्ति पार्टी के जिलाध्यक्ष राजकुमार दुबे ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि जांच में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और पर्यावरण संबंधी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो एसईसीएल प्रबंधन एवं आरकेटीसी कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

इसके अलावा कब्रिस्तान की भूमि पर किए जा रहे समतलीकरण और कथित नियम विरुद्ध कॉलोनी निर्माण पर तत्काल रोक लगाने तथा मोरों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। अब इस मामले में प्रशासन और संबंधित विभागों की जांच एवं कार्रवाई पर लोगों की नजरें टिकी हैं।