हाथियों के विचरण का हवाला देकर रात में बिजली बंद रखने की शिकायत, लाइन सुधारने के लिए भी अनुमति का इंतजार
कोरबा।जिले के सुदूर वनांचल एवं सीमावर्ती क्षेत्र मोरगा में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड की आठ ग्राम पंचायतों के ग्रामीण पिछले करीब चार माह से अनियमित विद्युत आपूर्ति की समस्या झेल रहे हैं। दिन हो या रात, बिजली कब गुल हो जाए और कब वापस आएगी, इसका कोई भरोसा नहीं रह गया है। सबसे चिंताजनक स्थिति हाथी प्रभावित गांवों की है, जहां जंगली हाथियों की आवाजाही के बीच बिजली गुल रहने से ग्रामीणों को जान-माल की सुरक्षा की चिंता सताती रहती है।
विभागीय लापरवाही और बिजली की आंख-मिचौली ने ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन प्रभावित कर दिया है।
सीएसईबी के कटघोरा वितरण संभाग के अंतर्गत आने वाले मोरगा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मदनपुर, मोरगा, पतुरियाडांड, घिचमुड़ी, अरसिया, खिरटी, धजाक एवं केंदई में विद्युत आपूर्ति लंबे समय से प्रभावित बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब चार माह से नियमित बिजली नहीं मिल रही है। कभी दिनभर तो कभी पूरी रात बिजली बंद रहती है।
इससे घरेलू कामकाज, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए कई बार विभागीय कर्मचारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
हाथियों के विचरण का हवाला, ग्रामीणों को अंधेरे में रहने की मजबूरी
ग्रामीणों के मुताबिक, जब भी बिजली बंद होने के कारणों की जानकारी संबंधित लाइनमैन हीरालाल कैवर्त से मांगी जाती है, तो अलग-अलग वजहें बताई जाती हैं। कई बार पड़ोसी जिले सूरजपुर के गांवों में हाथियों के विचरण का हवाला देकर रातभर बिजली बंद रखने की बात कही जाती है। हाथियों की सुरक्षा और संभावित दुर्घटनाओं को देखते हुए बिजली बंद रखने की दलील दी जाती है।
ग्रामीणों का सवाल है कि हाथियों की आवाजाही को देखते हुए एहतियाती कदम उठाना जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर पूरे क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था को लंबे समय तक प्रभावित रखना कहां तक उचित है? हाथी प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और उनकी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखने के लिए विभाग के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं है?
ग्रामीणों ने बिजली बंद होने के बाद आपूर्ति बहाल करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब कर्मचारी से खराब तार जोड़ने अथवा विद्युत लाइन दुरुस्त करने का आग्रह किया जाता है, तो कई बार पोड़ी-उपरोड़ा के कनिष्ठ अभियंता (जेई) से अनुमति नहीं मिलने की बात कहकर काम टाल दिया जाता है। इससे छोटी-मोटी खराबी दूर करने और बिजली बहाल करने में भी अनावश्यक विलंब होता है। ग्रामीणों के अनुसार, एक ओर बिजली बंद रहने की समस्या है तो दूसरी ओर उसे बहाल कराने के लिए भी उन्हें कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच समन्वय का इंतजार करना पड़ता है।
सुरक्षा के साथ बुनियादी सुविधाओं पर भी संकट
मोरगा क्षेत्र हाथी प्रभावित होने के कारण पहले से ही संवेदनशील है। ऐसे में रात के समय बिजली गुल रहने से ग्रामीणों को घरों से बाहर निकलने, आवागमन करने और जंगली हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने में परेशानी होती है। अंधेरे के कारण हाथियों की मौजूदगी का समय रहते पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों ने सीएसईबी के उच्चाधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए आठों पंचायतों में नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने, बिजली बंद रखने के कारणों की समीक्षा करने और खराब लाइनों को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की है।
Editor – Niraj Jaiswal
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