चांपा की शासकीय जमीन पर एक लाख टन राख पाटने की अनुमति का विरोध, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार

खसरा नंबर 167 की 1.60 हेक्टेयर भूमि पर सारडा एनर्जी को फ्लाई ऐश डालने की अनुमति; तालाब, हाट-बाजार और गौठान प्रभावित होने की जताई आशंका

कोरबा। करतला ब्लॉक के ग्राम पंचायत चांपा में शासकीय निस्तार एवं आरक्षित भूमि पर औद्योगिक राख (फ्लाई ऐश) पाटने की अनुमति को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि खसरा नंबर 167 की 1.60 हेक्टेयर भूमि पर एक लाख मीट्रिक टन राख डालने की अनुमति से गांव की सार्वजनिक सुविधाएं प्रभावित होंगी।

उन्होंने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत सौंपकर अनुमति निरस्त करने और संबंधित भूमि पर राख पाटने की गतिविधि पर रोक लगाने की मांग की है।

ग्रामीणों के आवेदन के अनुसार, खसरा नंबर 167 की भूमि का उपयोग गांव के लोग निस्तार और अन्य सार्वजनिक जरूरतों के लिए करते हैं। इसी जमीन पर सारडा एनर्जी को औद्योगिक राख पाटने की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 21 जुलाई 2026 को आदेश क्रमांक 1186/RO/TS/CECB/2026 जारी किया है। अनुमति के तहत यहां एक लाख मीट्रिक टन राख डाली जानी है।

अनुमति जारी करने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि भूमि की वास्तविक स्थिति, आसपास मौजूद जलस्रोतों और ग्रामीणों की निर्भरता का समुचित आकलन किए बिना अनुमति जारी की गई। उनका कहना है कि इस तरह की अनुमति देने से पहले मौके का निरीक्षण कर यह देखना जरूरी था कि संबंधित जमीन का उपयोग किन सार्वजनिक कार्यों के लिए हो रहा है और राख डालने से आसपास के क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

तालाब, हाट-बाजार और गौठान प्रभावित होने की आशंका
शिकायत में ग्रामीणों ने बताया है कि प्रस्तावित स्थल के आसपास तालाब, साप्ताहिक हाट-बाजार और गौठान जैसी सार्वजनिक सुविधाएं मौजूद हैं। उनका कहना है कि बड़ी मात्रा में औद्योगिक राख पाटे जाने से गांव की निस्तार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। साथ ही भूमि और जलस्रोतों पर संभावित दुष्प्रभाव को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है।

अनुमति निरस्त करने और स्थल निरीक्षण की मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर से खसरा नंबर 167 की भूमि का राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर परीक्षण कराने और मौके का निरीक्षण करने की मांग की है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा जारी अनुमति की समीक्षा कर उसे निरस्त करने तथा जांच पूरी होने तक राख पाटने की गतिविधि पर रोक लगाने का आग्रह किया है।

अब मामले में जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की ओर से की जाने वाली जांच और कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजर है।