पाली-लाफा मार्ग के अंधे मोड़ों पर दुर्घटना का खतरा, झुकी डालियों से सामने के वाहन नहीं आते नजर

कोरबा। पाली से लाफा होते हुए चैतुरगढ़ जाने वाले मार्ग पर पेड़ों की झुकी डालियां वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ा रही हैं। सड़क के अंधे मोड़ों पर शाखाएं दृश्यता बाधित करती हैं, जिससे सामने से आ रहे वाहन समय पर दिखाई नहीं देते। ऐसे में मोड़ पर अचानक आमने-सामने वाहन आने से टक्कर की आशंका बनी रहती है। मार्ग पर सुरक्षित आवागमन के लिए पेड़ों की छंटाई और दुर्घटना संभावित स्थानों पर आवश्यक सुरक्षा उपाय करने की मांग उठी है।

जानकारी के अनुसार, पाली-लाफा मार्ग के करीब आठ किलोमीटर के हिस्से में पांच से अधिक मोड़ ऐसे हैं, जहां वाहन चालकों को सामने की सड़क स्पष्ट दिखाई नहीं देती।

सड़क किनारे झुकी डालियों के कारण दृश्यता प्रभावित होती है। इससे विशेषकर मोड़ पर वाहन चलाते समय सावधानी और चुनौती बढ़ जाती है। स्थानीय स्तर पर इस समस्या के कारण दुर्घटनाएं होने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद मार्ग पर डालियों की छंटाई और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है।

चैतुरगढ़ जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही
पाली से लगभग 32 किलोमीटर दूर स्थित चैतुरगढ़ मां महिषासुर मर्दिनी के ऐतिहासिक मंदिर और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। घने जंगलों से घिरा यह क्षेत्र जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है और अपनी प्राकृतिक छटा के कारण ‘छत्तीसगढ़ का कश्मीर’ भी कहलाता है। मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी इसी मार्ग से आवाजाही करते हैं। ऐसे में सड़क पर सुरक्षित सफर सुनिश्चित करना जरूरी है।

निरीक्षण कराए जाने की मांग
जिला पंचायत सदस्य ने संबंधित विभाग से पाली से लाफा होते हुए चैतुरगढ़ जाने वाले मार्ग का निरीक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने सड़क किनारे दृश्यता में बाधा बन रही पेड़ों की डालियों की नियमानुसार कटाई-छंटाई कराने पर जोर दिया है। साथ ही दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील मोड़ों को चिह्नित कर वहां आवश्यक सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।

मांग है कि संबंधित विभाग मार्ग की स्थिति का आकलन कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए, ताकि स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।