वेतन और सुरक्षा की मांग पर अजय जायसवाल के नेतृत्व में लामबंद हुए ग्रामीण व श्रमिक, मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान
कोरबा। एसईसीएल की गेवरा खदान में मंगलवार को एक ओर कंपनी के सीएमडी (अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक) का दौरा चल रहा था, वहीं दूसरी ओर भू-विस्थापित श्रमिक अपनी लंबित मांगों को लेकर हड़ताल पर उतर आए। वेतन, सुरक्षा और अन्य समस्याओं के निराकरण की मांग करते हुए श्रमिकों एवं ग्रामीणों ने जिला पंचायत कोरबा के पूर्व उपाध्यक्ष अजय जायसवाल के नेतृत्व में खदान पहुंचकर काम बंद करा दिया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
श्रमिकों के अनुसार, गेवरा खदान में पीएनसी सहित अन्य कंपनियों में काम करने वाले भू-विस्थापित कर्मचारी पिछले छह महीने से विभिन्न समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि वेतन और सुरक्षा जैसी बुनियादी मांगों के समाधान के लिए पहले भी कई बार हड़ताल की गई, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
लगातार अनदेखी से श्रमिकों में नाराजगी बढ़ती गई और उन्होंने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया।मंगलवार को अजय जायसवाल के नेतृत्व में श्रमिकों और ग्रामीणों ने खदान पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया तथा काम बंद कराया। श्रमिकों ने अपनी मांगों के निराकरण तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
सीएमडी के दौरे के बीच श्रमिकों का प्रदर्शन
गेवरा खदान में सीएमडी के दौरे के बीच श्रमिकों की हड़ताल ने वेतन, सुरक्षा और अन्य लंबित समस्याओं को लेकर प्रबंधन के सामने सवाल खड़े किए हैं। अजय जायसवाल ने कहा कि सीएमडी का दौरा केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि खदान में काम करने वाले श्रमिकों और भू-विस्थापित परिवारों की समस्याओं पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने श्रमिकों के साथ कथित अनदेखी और शोषण के आरोपों की जांच कर समाधान की मांग की।
सीएमडी के दौरे के बीच श्रमिकों का प्रदर्शन
गेवरा खदान में सीएमडी के दौरे के बीच श्रमिकों की हड़ताल ने वेतन, सुरक्षा और अन्य लंबित समस्याओं को लेकर प्रबंधन के सामने सवाल खड़े किए हैं। अजय जायसवाल ने कहा कि सीएमडी का दौरा केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि खदान में काम करने वाले श्रमिकों और भू-विस्थापित परिवारों की समस्याओं पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने श्रमिकों के साथ कथित अनदेखी और शोषण के आरोपों की जांच कर समाधान की मांग की।
श्रमिकों का कहना है कि बार-बार मांग उठाने और आंदोलन करने के बावजूद समस्याओं का निराकरण नहीं होने से उन्हें दोबारा हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है। अब उनकी नजर प्रबंधन की पहल पर है। मांगों के समाधान को लेकर प्रबंधन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इससे आंदोलन की आगे की दिशा तय होगी।
Editor – Niraj Jaiswal
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