लाखों वाहनों का बोझ झेल रहीं कोरबा की सड़कें, मजबूती और गुणवत्ता पर सवाल

कोरबा। औद्योगिक गतिविधियों और बढ़ते यातायात के बीच कोरबा जिले की सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। मार्च 2026 तक जिले में सभी श्रेणियों के पंजीकृत वाहनों की संख्या लगभग 3 लाख 77 हजार पहुंच चुकी थी।

इसके अलावा दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले वाहनों की आवाजाही भी सड़कों पर बनी रहती है। ऐसे में सड़क निर्माण की गुणवत्ता, निर्धारित भारवहन क्षमता और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि सड़कें निर्धारित मानकों और तकनीकी मापदंडों के अनुरूप बनाई जा रही हैं, तो कई स्थानों पर बार-बार टूट-फूट और मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ रही है, यह जांच का विषय है।

कोरबा जिले में डब्ल्यूबीएम, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री सड़क विकास परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी विभिन्न श्रेणियों की सड़कें यातायात का प्रमुख आधार हैं। भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण कार्य भी जारी है। इन सड़कों से सामान्य यात्री परिवहन के साथ कोयला, औद्योगिक सामग्री और अन्य सामान की आवाजाही होती है। औद्योगिक जिले की जरूरतों के कारण कई मार्गों पर भारी वाहनों का दबाव भी बना रहता है।

भारी वाहनों की आवाजाही भी बड़ी चुनौती

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में भारी वाहनों की संख्या 11 हजार 685 बताई गई है। इनमें कोयला खदानों और औद्योगिक क्षेत्रों में चलने वाले भारी वाहन, ट्रेलर, जेसीबी, हाइड्रा सहित अन्य वाहन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हल्के वाहनों और बसों की आवाजाही भी सड़कों पर दबाव बढ़ाती है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, जिले में 2,813 हल्के वाहन और विभिन्न मार्गों पर संचालित तथा स्कूलों से संबंधित 320 बसें दर्ज हैं।

पंजीकृत वाहनों की संख्या के साथ सड़क पर वास्तविक यातायात का आकलन करते समय दूसरे क्षेत्रों से आने-जाने वाले वाहनों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। खासकर औद्योगिक और खनन क्षेत्रों से जुड़े मार्गों पर भारी वाहनों की नियमित आवाजाही सड़क की सतह पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। हालांकि, सड़क टूटने के पीछे केवल वाहनों का दबाव ही कारण नहीं होता। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, सड़क की मोटाई, मिट्टी और आधार की स्थिति, जल निकासी, रखरखाव तथा निर्धारित भार सीमा का पालन भी सड़क की उम्र को प्रभावित करते हैं।

हर साल मरम्मत, फिर भी टिकाऊपन पर सवाल

कोरबा में विभिन्न मार्गों पर डामर और कंक्रीट से मरम्मत तथा सुधार कार्य होते रहे हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर सड़क की सतह खराब होने और दोबारा मरम्मत की जरूरत पड़ने से निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन को लेकर सवाल उठते हैं। सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों के पालन के साथ यह देखना भी जरूरी है कि संबंधित मार्ग पर वाहनों का वास्तविक दबाव उसकी डिजाइन क्षमता के अनुरूप है या नहीं।

यदि सड़कें तय मानकों के अनुसार बनाई गई हैं, तो उनकी समय से पहले होने वाली टूट-फूट के कारणों का तकनीकी परीक्षण होना चाहिए। वहीं, जहां भारी वाहनों की आवाजाही सड़क की निर्धारित क्षमता से अधिक है, वहां उपयुक्त निर्माण संरचना, नियमित रखरखाव और यातायात प्रबंधन पर ध्यान देना आवश्यक है।

सुधार कार्यों की टिकाऊपन पर भी हो निगरानी

सड़क मरम्मत पर हर वर्ष खर्च होने वाली राशि के साथ यह आकलन भी जरूरी है कि सुधार कार्य कितने समय तक टिक रहे हैं। निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों को सड़क की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, जल निकासी व्यवस्था तथा निर्धारित भार क्षमता के अनुरूप यातायात की स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। तकनीकी जांच और नियमित निगरानी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़कें किन कारणों से खराब हो रही हैं और उनके स्थायी समाधान के लिए किस तरह के उपाय जरूरी हैं।

कोरबा जैसे औद्योगिक जिले में सड़कों की मजबूती केवल आवागमन की सुविधा का विषय नहीं, बल्कि सुरक्षित यातायात और औद्योगिक परिवहन से भी जुड़ी है। ऐसे में बार-बार मरम्मत के बजाय टिकाऊ निर्माण और जवाबदेही पर जोर देना जरूरी है।