कोरबा में 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट बनेंगे,1.32 करोड़ रुपये स्वीकृत

180 से अधिक ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा, ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी होंगे सृजित

कोरबा। जिले में गिरते भूजल स्तर को नियंत्रित करने और वर्षा जल के संरक्षण एवं पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों के लिए 1 करोड़ 32 लाख 97 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जिले की 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में संचालित इस पहल से वर्षा जल को जमीन के भीतर पहुंचाने के साथ ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।

वर्षा जल को जमीन के भीतर पहुंचाने में मिलेगी मदद
बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट ऐसी संरचना है, जिसके माध्यम से वर्षा जल को रेत और अन्य फिल्टर सामग्री से छानकर जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है। इससे भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है। साथ ही बोरवेल और आसपास के जल स्रोतों के जलस्तर को बनाए रखने में भी सहायता मिल सकती है।

शासकीय भवनों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भवनों में ऐसी संरचनाओं का निर्माण वर्षा जल के बेहतर उपयोग और जल संरक्षण की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।

पांचों विकासखंडों में बनेंगे 234 रिचार्ज पिट
जिले के पांचों विकासखंडों में स्थानीय जरूरत और उपलब्धता के अनुसार रिचार्ज पिट का निर्माण कराया जा रहा है। विकासखंडवार निर्माण की स्थिति इस प्रकार है—

करतला: 64 रिचार्ज पिट

कटघोरा: 30 रिचार्ज पिट

कोरबा: 66 रिचार्ज पिट

पाली: 13 रिचार्ज पिट

पोड़ी-उपरोड़ा: 61 रिचार्ज पिट

इस तरह जिले में कुल 234 रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं। इनमें कोरबा विकासखंड में सर्वाधिक 66 और पाली विकासखंड में 13 रिचार्ज पिट शामिल हैं।

जल संरक्षण के साथ रोजगार सृजन पर जोर
इन संरचनाओं के निर्माण से विशेषकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जहां जलस्तर में गिरावट की समस्या है। वर्षा जल का बेहतर उपयोग होने से जल उपलब्धता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के तहत स्वीकृत इन कार्यों के माध्यम से जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए भी जल संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में ठोस प्रयास करना है।