कोरबा। पुटका पहाड़ स्थित रामकचहरी में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और अध्यात्म का संदेश देने के लिए नगर निगम ने 17 अक्टूबर को 13 किलोमीटर का वाकथान आयोजित किया। आयोजन में जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ फिल्म ‘हनुमान अंश’ के नायक शोभिनव सत्य भी शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान रामकचहरी के विकास और मंदिर निर्माण की चर्चा हुई, लेकिन अब स्थल के प्रवेश द्वार पर वन विभाग का ताला लगने के बाद आयोजन की अनुमति से लेकर निर्माण की वैधानिकता तक पर सवाल उठने लगे हैं।
नगर निगम की पहल को उस समय स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर प्रस्तुत किया गया था। दूधीडांगर से रामकचहरी तक आयोजित ‘चलो रामकचहरी-राम भांचा के द्वार’ वाकथान में प्रतिभागियों ने स्थल पर पहुंचकर स्वच्छता और अध्यात्म का संदेश दिया। हालांकि, अब प्रवेश द्वार पर ताला लगाए जाने से यहां आने वाले लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की बात सामने आई है। ताला किस कारण और किस आदेश के तहत लगाया गया, इसकी विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
सबसे अहम सवाल यह है कि वन क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित करने से पहले जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं। नगर निगम आयुक्त का कहना है कि कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद थे, जबकि वन मंडलाधिकारी ने अनुमति संबंधी जानकारी जुटाने की बात कही है। ऐसे में दोनों विभागों के बयानों के बीच अनुमति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
वाकथान में पूजा-अर्चना, विकास और मंदिर निर्माण की चर्चा
17 अक्टूबर को आयोजित वाकथान में शोभिनव सत्य ने रामकचहरी स्थित हनुमान प्रतिमा पर वंदन-लेपन कर पूजा-अर्चना की और ऐतिहासिक स्थल का भ्रमण किया। उन्होंने आयोजन को अध्यात्म, प्रकृति, पर्यावरण और स्वच्छता का संगम बताते हुए नगर निगम की पहल की सराहना की थी।
कार्यक्रम के दौरान रामकचहरी के विकास और मंदिर निर्माण की बात सामने आने के बाद वन क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों की अनुमति को लेकर सवाल उठने लगे। वन भूमि पर निर्माण के लिए लागू कानूनी प्रावधानों के मद्देनजर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मंदिर निर्माण की बात औपचारिक प्रस्ताव के रूप में रखी गई थी या केवल स्थल के विकास को लेकर चर्चा हुई थी।
आयुक्त बोले कार्यक्रम में वनकर्मी भी थे मौजूद
नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय ने कहा कि स्वच्छता अभियान पुनीत कार्य है और इसे वन क्षेत्र में भी चलाया जा सकता है। उनके अनुसार, आयोजन के बाद स्थल की सफाई कराई गई थी। कचरे से संबंधित तस्वीरें कार्यक्रम के दूसरे दिन की हैं।
अनुमति के सवाल पर आयुक्त ने कहा कि कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए थे। उन्होंने मंदिर निर्माण की बात को तोड़-मरोड़कर पेश किए जाने की बात कहते हुए स्पष्ट किया कि जल संरक्षण और पौधारोपण जैसे कार्यों में सहयोग की बात की जा सकती है।
डीएफओ बोलीं अनुमति की जानकारी लेकर करेंगे स्पष्ट
वन मंडलाधिकारी कोरबा प्रेमलता यादव ने बताया कि आयोजन के समय वह प्रशिक्षण में थीं। कार्यक्रम के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन संरक्षण अधिनियम के तहत वन क्षेत्र में निर्माण नहीं किया जा सकता।
वन विभाग के इस रुख के बाद रामकचहरी में मंदिर निर्माण की चर्चा और आयोजन की अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी हो गया है। विभागीय जानकारी सामने आने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि कार्यक्रम के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं और प्रवेश द्वार पर ताला लगाए जाने के पीछे क्या कारण है।
रामकचहरी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाला स्थल है। यहां स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और विकास की पहल के साथ वन नियमों का पालन भी जरूरी है। अब सवाल यह है कि वाकथान से पहले अनुमति की प्रक्रिया पूरी हुई थी या नहीं और रामकचहरी तक लोगों की पहुंच को लेकर वन विभाग आगे क्या निर्णय लेता है।
Editor – Niraj Jaiswal
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