रात में ड्यूटी से नदारद रहे डॉक्टर तो होगी कार्रवाई

एसईसीएल के बांकी और सुराकछार अस्पतालों में सख्ती,सीएमओ ने जारी किया परिपत्र;अगली शिफ्ट के चिकित्सक को चार्ज सौंपे बिना नहीं छोड़ सकेंगे अस्पताल

कोरबा।एसईसीएल के बांकी और सुराकछार विभागीय अस्पतालों में रात्रिकालीन चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रबंधन ने सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं।

ड्यूटी के दौरान चिकित्सकों की अनुपस्थिति और मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिलने संबंधी शिकायतों के मद्देनजर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) ने परिपत्र जारी कर निर्धारित समय में अस्पताल में मौजूदगी अनिवार्य कर दी है।

निर्देशों के उल्लंघन और ड्यूटी में लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

शिफ्ट बदलने पर चार्ज सौंपना अनिवार्य
सीएमओ की ओर से शनिवार को जारी परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्धारित ड्यूटी अवधि में अपने कार्यस्थल पर उपस्थित रहना होगा।

रात्रिकालीन ड्यूटी करने वाले चिकित्सकों को विशेष रूप से अस्पताल परिसर में मौजूद रहने और जरूरत पड़ने पर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

परिपत्र के मुताबिक, शिफ्ट समाप्त होने पर चिकित्सक अपनी ड्यूटी पूरी कर अस्पताल तभी छोड़ सकेंगे, जब वे अगले चिकित्सक को विधिवत चार्ज सौंप देंगे।

ड्यूटी हस्तांतरण की इस व्यवस्था का उद्देश्य चिकित्सकीय सेवाओं में किसी भी तरह का व्यवधान रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि एक शिफ्ट से दूसरी शिफ्ट के बीच मरीजों को उपचार के लिए इंतजार न करना पड़े। निर्देश सभी चिकित्सा अधिकारियों पर लागू होंगे तथा इनके पालन की निगरानी की जाएगी।

आपात स्थिति में डॉक्टर की उपलब्धता पर जोर
रात के समय अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के लिए चिकित्सक की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। दुर्घटना, अचानक तबीयत बिगड़ने या अन्य आपात परिस्थितियों में समय पर उपचार नहीं मिलने से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में ड्यूटी के दौरान चिकित्सकों की मौजूदगी और शिफ्ट के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद जारी इन निर्देशों से चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।हालांकि,इनका वास्तविक असर नियमित निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

अब देखना होगा कि नई सख्ती के बाद रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान चिकित्सकों की उपलब्धता कितनी सुनिश्चित हो पाती है और मरीजों को समय पर उपचार मिल पाता है या नहीं।