धतूरा में बाउंड्री में बंद गायों की मौत से उठे सवाल

17-18 दिनों से बंद मवेशियों को चारा-पानी नहीं मिलने का आरोप, दूसरी गाय की मौत के बाद ग्रामीणों में नाराजगी

कोरबा। जिले के ग्राम धतूरा में मवेशियों की देखरेख और प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गौशाला भेजने के लिए पकड़ी गई गायों में से कुछ को शासकीय उचित मूल्य की दुकान (सोसाइटी) की बाउंड्री में करीब 17 से 18 दिनों तक बंद रखा गया, लेकिन उनके लिए पर्याप्त चारा-पानी की व्यवस्था नहीं की गई। इसी दौरान 10 अक्टूबर को दूसरी गाय की भी मौत हो गई।

लगातार दो गायों की मौत से ग्रामीणों में नाराजगी है। उन्होंने मामले की जांच कराकर मवेशियों की देखरेख में कथित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

52 गायों को गौशाला भेजा, आठ को बाउंड्री में रखा
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत की ओर से आवारा मवेशियों को पकड़कर गौशाला भेजने की व्यवस्था की गई थी। इसके तहत करीब 52 गायों को अंडी कछार स्थित गौशाला भेजा गया, जबकि लगभग आठ गायों को सोसाइटी की बाउंड्री के भीतर ही रखा गया। आरोप है कि इन मवेशियों को लंबे समय तक बाउंड्री में बंद रखा गया, लेकिन उनकी जरूरतों के अनुरूप भोजन और पानी की व्यवस्था नहीं की गई।

शिकायत के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधरने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि बाउंड्री में बंद गायों की स्थिति को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया गया था। उन्होंने मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा-पानी उपलब्ध कराने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की मांग भी की थी।

इसके बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

ग्रामीणों के मुताबिक, पहले एक गाय की मौत हुई और फिर 10 अक्टूबर को दूसरी गाय ने भी दम तोड़ दिया।

लगातार दो गायों की मौत के बाद मवेशियों की देखरेख को लेकर पंचायत की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आवारा मवेशियों को पकड़कर निर्धारित स्थान पर भेजने के साथ उनके भोजन, पानी और सुरक्षा का इंतजाम करना भी जरूरी है।

जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने बाउंड्री में रखे गए मवेशियों की स्थिति, उनकी देखरेख की व्यवस्था और गायों की मौत के कारणों की जांच करने की अपील की है। साथ ही, यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि मवेशियों के प्रबंधन के नाम पर की जाने वाली व्यवस्था का उद्देश्य उनकी सुरक्षा और देखभाल होना चाहिए। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को समय रहते उचित कदम उठाने चाहिए।