जनपद सीईओ ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की; एक माह बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ने पर उठे सवाल, राज्यपाल और मुख्य सचिव तक पहुंची शिकायत
कोरबा/पाली। पाली जनपद की 23 ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त की राशि से कराए गए कार्यों और भुगतान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच का मामला अब कार्रवाई के इंतजार में अटक गया है। शिकायत के बाद गठित जांच समिति के समक्ष कई पंचायत सचिवों द्वारा वांछित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने और कुछ सचिवों द्वारा आधे-अधूरे दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की बात जांच प्रतिवेदन में सामने आई है।
जनपद पंचायत पाली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मामले को अनुशासनहीनता मानते हुए संबंधित पंचायत सचिवों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है। इसके बावजूद करीब एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 में 15वें वित्त के तहत ग्राम पंचायतों को मिले आवंटन से कराए गए कार्यों और उनके भुगतान से जुड़ा है। सूचना के अधिकार के तहत 23 ग्राम पंचायतों से पंचायत प्रस्ताव, देयक-वाउचर सहित संबंधित अभिलेखों की सत्यप्रतियां मांगी गई थीं। निर्धारित अवधि में जानकारी नहीं मिलने पर प्रथम अपील की गई। अपीलीय अधिकारी ने आवेदन को विधिसम्मत पाते हुए संबंधित जनसूचना अधिकारियों को वांछित जानकारी नि:शुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
17 अप्रैल को कलेक्टर से हुई थी शिकायत
वांछित अभिलेख उपलब्ध नहीं होने और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका के आधार पर शिकायतकर्ता ने 17 अप्रैल 2026 को कलेक्टर के समक्ष लिखित शिकायत की। शिकायत में 15वें वित्त से कराए गए कार्यों की ग्रामसभा कार्यवाही पंजी,उपस्थिति पंजी,व्यय प्रमाणक,देयक-वाउचर, इनवॉइस बिल, टीडीएस कटौती, जमा राशि तथा कार्यों की गुणवत्ता का परीक्षण कराने और भौतिक सत्यापन की मांग की गई थी।
इसके बाद उप संचालक पंचायत, जिला कोरबा ने 23 जून 2026 को पत्र क्रमांक 3036 के माध्यम से जनपद पंचायत पाली के सीईओ को संबंधित पंचायतों की शिकायतों की जांच कर प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए।
8 सचिवों ने अधूरे दस्तावेज दिए, 16 ने नहीं दिए अभिलेख
निर्देश के पालन में सहायक विकास विस्तार अधिकारी के नेतृत्व में करारोपण अधिकारियों की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। संबंधित पंचायत सचिवों को आवश्यक अभिलेखों के साथ जांच के लिए बुलाया गया।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार बतरा, उड़ता, पुलालीकला, केराझरिया, पोटापानी, तिवरता, धौराभांठा और सिरकीखुर्द के सचिवों ने आधे-अधूरे अभिलेख प्रस्तुत किए। इनमें इनवॉइस बिल, टीडीएस कटौती और जमा राशि से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
वहीं नगोई, केराकछार, नुनेरा, खैराडूबान, धतूरा, दमिया, चोढ़ा, चैतमा, सगुना, डोड़की, सेंद्रीपाली, उतरदा, रंगोले, मुरली, बकसाही और सराईपाली के सचिवों द्वारा जांच दल को वांछित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने की बात प्रतिवेदन में दर्ज है।
सीईओ ने माना गंभीर अनुशासनहीनता
जांच में सहयोग नहीं करने और अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने को जनपद सीईओ ने गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना। जांच दल के प्रतिवेदन के आधार पर 23 ग्राम पंचायतों के जनसूचना अधिकारी सह पंचायत सचिवों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
जनपद पंचायत पाली के सीईओ कार्यालय से जांच प्रतिवेदन एवं अभिमत सहित पत्र क्रमांक 3801, दिनांक 3 सितंबर 2026 को उप संचालक पंचायत को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया। इसकी प्रतिलिपि शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध कराई गई।
कार्रवाई में देरी पर उठ रहे सवाल
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच प्रतिवेदन और कार्रवाई की अनुशंसा प्राप्त होने के बावजूद अब तक संबंधित सचिवों पर कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि अन्य मामलों में जांच में असहयोग अथवा अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने पर पंचायत सचिवों के खिलाफ निलंबन और वेतन वृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई की गई है। ऐसे में 23 सचिवों के इस मामले में कार्रवाई लंबित रहने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राज्यपाल और मुख्य सचिव तक पहुंची शिकायत
कार्रवाई में देरी से नाराज शिकायतकर्ता ने अब मामले की लिखित शिकायत राज्यपाल और छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव से की है। शिकायत की प्रतिलिपि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव, बिलासपुर संभाग के आयुक्त, कलेक्टर कोरबा और जिला पंचायत सीईओ को भी भेजी गई है।
शिकायतकर्ता ने मामले में जांच के आधार पर पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, 15वें वित्त की राशि में वास्तविक वित्तीय अनियमितता या राशि के दुरुपयोग की पुष्टि जांच के अंतिम निष्कर्ष और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
Editor – Niraj Jaiswal
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