एनएच-149बी के प्रभावित 10 गांवों में चिन्हित खसरों से लगी 100 मीटर भूमि को छोड़कर शेष जमीन की खरीदी-बिक्री का रास्ता साफ
कोरबा। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 149-बी के चांपा- कोरबा- छुरी-कटघोरा फोरलेन परियोजना से प्रभावित जमीनों को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा आदेश जारी किया है।
भू-अर्जन की प्रक्रिया के चलते प्रभावित निजी भूमि की खरीदी-बिक्री, बटांकन, खाता विभाजन, छोटे टुकड़ों में अंतरण और व्यपवर्तन पर लगाई गई रोक को आंशिक रूप से शिथिल कर दिया गया है। हालांकि, यह राहत सभी जमीनों के लिए नहीं है। आदेश के अनुसार प्रभावित खसरों और उनसे लगी 100 मीटर तक की भूमि पर प्रतिबंध जारी रहेगा, जबकि इसके बाहर की शेष भूमि पर लगी रोक शिथिल की गई है।
यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 149-बी के चांपा-कोरबा-छुरी-कटघोरा (पैकेज-2) के कि.मी. 38.200 से कि.मी. 80.295 तक प्रस्तावित चार लेन सड़क निर्माण से संबंधित है। परियोजना के लिए कोरबा, दर्री, कटघोरा और पोड़ी-उपरोड़ा तहसील के प्रभावित निजी भू-खंडों पर पूर्व में विभिन्न प्रकार के अंतरण पर प्रतिबंध लगाया गया था।
10 गांवों के खसरों को लेकर जारी हुआ आदेश
परियोजना निदेशक, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, परियोजना कार्यालय बिलासपुर द्वारा परियोजना से प्रभावित होने वाले खसरों की सूची जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई गई थी।
इसमें भिलाईखुर्द, पण्डरीपानी, जेंजरा, बिरवट, सोनपुरी, महेशपुर, नवागांव, गोपालपुर, डोडकधरी और छुरीकला गांव शामिल हैं।

जिला दंडाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन गांवों में सूचीबद्ध प्रभावित खसरों तथा उनसे लगे 100 मीटर तक के खसरा नंबरों को छोड़कर शेष भूमि पर लगाया गया प्रतिबंध शिथिल किया जाता है। यानी इन 10 गांवों में भी जमीन की खरीदी-बिक्री की पूरी तरह से छूट नहीं दी गई है।
बाकी गांवों में प्रतिबंध रहेगा जारी
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि परियोजना से संबंधित अन्य गांवों में पहले से लागू प्रतिबंध यथावत रहेगा। ऐसे में जमीन मालिकों को यह राहत पूरे क्षेत्र के लिए लागू मानने के बजाय अपने खसरा नंबर की स्थिति की जांच करनी होगी।
2024 में लगाई गई थी रोक
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के 14 अक्टूबर 2024 के निर्देश के बाद जिला कार्यालय द्वारा 23 अक्टूबर 2024 को प्रभावित जमीनों की खरीदी-बिक्री, बटांकन, छोटे टुकड़ों में अंतरण, खाता विभाजन और व्यपवर्तन पर रोक लगाने के संबंध में कार्रवाई की गई थी।
अब राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से संबंधित उपलब्ध कराई गई खसरा सूची के आधार पर प्रतिबंध में यह आंशिक राहत दी गई है।
जमीन मालिकों के लिए खसरा नंबर देखना जरूरी
प्रशासन के इस आदेश के बाद प्रभावित क्षेत्र के जमीन मालिकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि सिर्फ गांव का नाम देखकर जमीन की खरीदी-बिक्री की अनुमति मान लेना उचित नहीं होगा। संबंधित खसरा नंबर परियोजना की प्रभावित सूची में है या नहीं और उसके आसपास 100 मीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र आता है या नहीं, इसकी पुष्टि करना जरूरी होगा। इसके बाद ही जमीन के अंतरण संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।






Editor – Niraj Jaiswal
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