कच्चे तेल की कीमतें करीब, फिर पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों? सीपीआई ने उठाए सवाल

कोरबा। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने नाराजगी जताई है। पार्टी के जिला सचिव पवन कुमार वर्मा ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और देश में पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों की तुलना करते हुए सरकार की मूल्य निर्धारण व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

पवन कुमार वर्मा ने कहा कि वर्ष 2014 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 108 से 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इसके बावजूद उस समय देश में पेट्रोल करीब 71 रुपये और डीजल करीब 55 रुपये प्रति लीटर था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कच्चे तेल की कीमत 102.25 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जो उनके अनुसार वर्ष 2014 के औसत के करीब अथवा उससे कम है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल 102 से 115 रुपये और डीजल 95 से 104 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है।

निजी कंपनी की कीमत बढ़ोतरी का हवाला
वर्मा ने नायरा एनर्जी द्वारा पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये की बढ़ोतरी किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने आशंका जताई कि निजी कंपनी की कीमत बढ़ोतरी के बाद आने वाले दिनों में सरकारी तेल कंपनियां भी कीमतों में वृद्धि कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है और इसका प्रभाव दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है। उन्होंने सरकार से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर स्पष्ट नीति अपनाने और आम जनता को राहत देने की मांग की।