12 घंटे इलाज का इंतजार, आयोग अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुआ उपचार

चाकाबुड़ा में प्रसव के बाद महिला की हालत गंभीर, जिला अस्पताल में करीब 12 घंटे उपचार शुरू नहीं होने का परिजनों का दावा; भाजपा नेता राजेश यादव ने उठाए सवाल

कोरबा। प्रसव के बाद गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंची एक महिला को कथित तौर पर करीब 12 घंटे तक उपचार का इंतजार करना पड़ा। मामला चाकाबुड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा है, जहां प्रसव के बाद महिला की स्थिति बिगड़ने पर उसे जिला चिकित्सालय कोरबा रेफर किया गया।

परिजनों के अनुसार महिला को रात करीब 2 बजे जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन दोपहर करीब 2 बजे तक उपचार शुरू नहीं हो सका।

मामला सामने आने के बाद भाजपा प्रदेश सह संयोजक राजेश यादव ने इसकी जानकारी छत्तीसगढ़ बाल आयोग की अध्यक्ष एवं दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री डॉ. वर्णिका शर्मा को दी। आरोप है कि आयोग अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद महिला का उपचार शुरू हुआ। उपचार मिलने के बाद जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति संभली।

12 घंटे के इंतजार पर उठे सवाल
घटना को लेकर राजेश यादव ने जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रसव के बाद गंभीर स्थिति में पहुंची महिला को यदि वास्तव में करीब 12 घंटे तक उपचार के लिए इंतजार करना पड़ा, तो यह बेहद गंभीर मामला है।

उन्होंने सवाल उठाया कि रात 2 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद दोपहर 2 बजे तक उपचार क्यों शुरू नहीं हुआ? इस दौरान महिला और नवजात की स्थिति को लेकर अस्पताल में क्या चिकित्सकीय निर्णय लिए गए और उपचार में देरी की वजह क्या थी, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।

निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
राजेश यादव ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी चिकित्सक, कर्मचारी या व्यवस्था स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार मिलना चाहिए। विशेषकर प्रसव के बाद जच्चा और नवजात की स्थिति में किसी भी तरह की देरी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

डॉ. वर्णिका शर्मा का जताया आभार
राजेश यादव ने मामले में हस्तक्षेप करने के लिए डॉ. वर्णिका शर्मा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति में आयोग अध्यक्ष ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल संज्ञान लिया, जिसके बाद महिला को उपचार मिल सका।

उन्होंने शासन-प्रशासन से जिला अस्पताल की उपचार व्यवस्था की समीक्षा करने तथा ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए अनावश्यक रूप से घंटों इंतजार न करना पड़े।