भू-अर्जन के बाद नौकरी-मुआवजे का इंतजार कब होगा खत्म?

जनदर्शन में फिर पहुंचे भू-विस्थापित, लंबित प्रकरणों के साथ 114 आवेदन मिले; कलेक्टर ने समयबद्ध निराकरण के दिए निर्देश

कोरबा। एसईसीएल सहित विभिन्न उद्योगों की स्थापना के लिए जमीन अधिग्रहित होने के बाद भी प्रभावित लोगों को नौकरी और मुआवजा नहीं मिलने की शिकायतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जनदर्शन में एक बार फिर भू-अर्जन से जुड़े ऐसे मामले सामने आए। प्रभावित लोगों ने लंबित प्रकरणों के निराकरण की मांग प्रशासन के समक्ष रखी।

जनदर्शन में जिलेभर से पहुंचे नागरिकों ने अलग-अलग विभागों से संबंधित 114 आवेदन प्रस्तुत किए। इनमें वनपट्टा संबंधी जांच, मानदेय एवं लंबित वेतन भुगतान, शिक्षा प्रोत्साहन योजना का लाभ, पीएम आवास की लंबित राशि, राशन कार्ड, महतारी वंदन योजना की राशि, स्वास्थ्य जांच, किसान क्रेडिट कार्ड, बकरी शेड निर्माण के लिए सहायता, शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने, राहत राशि, बिजली बिल में सुधार तथा भूमि अधिग्रहण के बाद नौकरी और मुआवजा से जुड़े प्रकरण प्रमुख रहे।

इसके अलावा नागरिकों ने सहायक उपकरण उपलब्ध कराने, अभिलेखों में त्रुटि सुधार एवं रिकॉर्ड दुरुस्ती, नए राशन कार्ड जारी करने और पात्र लोगों को आजीविका के साधनों से जोड़ने जैसी मांगें भी रखीं। कई आवेदकों ने लंबित मुआवजा प्रकरणों की जांच कर उनका निराकरण कराने की मांग की।

समयबद्ध निराकरण पर जोर

कलेक्टर ने कहा कि जनदर्शन शासन और नागरिकों के बीच सीधे संवाद का प्रभावी माध्यम है। इसके जरिए आमजन अपनी समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखते हैं और संबंधित विभागों के माध्यम से उनके समाधान की कार्रवाई की जाती है।

उन्होंने अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों की नियमित समीक्षा करने तथा प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। खासकर लंबे समय से लंबित मामलों में आवश्यक कार्रवाई कर आवेदकों को राहत पहुंचाने पर जोर दिया गया।

जनदर्शन में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन, ओएसडी तरुण कुमार किरण, सहायक कलेक्टर इशांत जायसवाल, अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, अपर कलेक्टर ओंकार यादव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।