KORBA: 14.34 करोड़ की सीवरेज लाइन पर सवाल, विकास के नाम पर सड़कों की खुदाई से बढ़ी परेशानी

शिवाजी नगर और एमपी नगर में 6 इंच पाइप बिछाने पर उठे सवाल, गड्ढे-कीचड़ और धूल से लोग परेशान

पार्षद ने कलेक्टर से की तकनीकी जांच और DPR की समीक्षा की मांग, भविष्य की जरूरत के हिसाब से क्षमता बढ़ाने की मांग

कोरबा। नगर निगम क्षेत्र के पॉश इलाकों शिवाजी नगर और एमपी नगर में करीब 14.34 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे सीवरेज लाइन निर्माण को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस परियोजना से भविष्य में सीवरेज और जल निकासी की समस्या का समाधान होना है, उसका मौजूदा निर्माण कार्य फिलहाल राहत से ज्यादा परेशानी का कारण बन गया है। सड़कों की खुदाई, गड्ढे, धूल और कीचड़ के कारण सामान्य आवागमन प्रभावित हो रहा है।

वार्ड क्रमांक 25 और 26 में सीवरेज लाइन बिछाने के लिए मुख्य सड़कों के किनारे तथा आंतरिक सड़कों के बीच करीब एक मीटर तक खुदाई की जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पाइप बिछाने के बाद खुदाई वाले हिस्से को उसी मिट्टी से पाटा जा रहा है। कई स्थानों पर मिट्टी धंसने और बारिश या घरों से निकलने वाले पानी के कारण रास्ते कीचड़ में तब्दील हो गए हैं।

6 इंच पाइप की क्षमता पर सवाल
निर्माण में इस्तेमाल हो रही पाइपलाइन की क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और कुछ जानकारों का कहना है कि वर्तमान में करीब 200 एमएम (लगभग 8 इंच) HDPE पाइप बिछाई जा रही है, जबकि भविष्य में बढ़ती आबादी और भवनों की संख्या को देखते हुए बड़ी क्षमता की पाइपलाइन की जरूरत हो सकती है।

लोगों का तर्क है कि क्षेत्र में पहले से सीवरेज लाइन मौजूद रही है और समय के साथ पुराने मकानों की जगह दो-तीन मंजिला भवन बने हैं। आबादी बढ़ने के साथ सीवरेज और जल निकासी पर दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में परियोजना तैयार करते समय भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने की मांग की जा रही है।

खुदाई के बाद सड़क की हालत बदतर


सीवरेज लाइन बिछाने के लिए की गई खुदाई के बाद सड़कों की स्थिति को लेकर भी नाराजगी है। कई जगह खुदाई वाले हिस्से में मिट्टी डालकर रास्ता समतल किया गया है, लेकिन वाहनों की आवाजाही और पानी के कारण मिट्टी धंसने से गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते बन गए हैं। इससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों को भी परेशानी हो रही है।

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब करोड़ों रुपये की परियोजना के लिए सड़कें खोदी जा रही हैं तो निर्माण पूरा होने के बाद उन्हें मूल स्थिति में बहाल करने की व्यवस्था क्या है? लोगों को आशंका है कि बाद में इन्हीं सड़कों की मरम्मत पर दोबारा सरकारी राशि खर्च करनी पड़ सकती है।

चैंबर की गुणवत्ता को लेकर भी आपत्ति

सीवरेज पाइप के कनेक्शन के लिए बनाए जा रहे चैंबर को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर फ्लाई ऐश ईंटों से चैंबर तैयार किए जा रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता और चैंबर के डिजाइन की जांच तकनीकी विशेषज्ञों से कराई जाए।

पार्षद ने कलेक्टर को पत्र लिखकर उठाए सवाल

शिवाजी नगर वार्ड के पार्षद अनुज कुमार जायसवाल ने भी निर्माण कार्य को लेकर कलेक्टर को पत्र सौंपकर तकनीकी अनियमितताओं और गुणवत्ता संबंधी शिकायतें उठाई हैं। पत्र में दावा किया गया है कि कार्य में DPR और स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप काम नहीं होने, पाइपलाइन की क्षमता तथा चैंबर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर जांच की आवश्यकता है।

पार्षद ने निर्माण स्थल पर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की नियमित निगरानी का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने कलेक्टर से उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, DPR एवं स्वीकृत डिजाइन की समीक्षा और भविष्य की जरूरत के अनुरूप पाइपलाइन क्षमता के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। साथ ही यदि निर्माण में अनियमितता या घटिया गुणवत्ता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।

सामुदायिक भवन के इस्तेमाल पर भी उठी आपत्ति
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में लगी निजी ठेका कंपनी के कर्मचारियों के ठहरने के लिए सामुदायिक भवन के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया है। लोगों का कहना है कि सामुदायिक भवन सार्वजनिक संपत्ति है और इसके उपयोग के लिए निर्धारित प्रक्रिया एवं अनुमति का पालन किया जाना चाहिए। इस मामले में भी संबंधित अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।

करोड़ों की परियोजना, जवाबदेही पर निगाह
सीवरेज लाइन परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की पुरानी जल निकासी और सीवरेज समस्या का स्थायी समाधान करना है। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, पाइपलाइन की क्षमता, चैंबर की मजबूती और सड़क बहाली की व्यवस्था की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए।

लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद यदि पाइपलाइन की क्षमता भविष्य की जरूरत के लिए कम पड़ती है या सड़कें दोबारा खराब होती हैं, तो परियोजना का उद्देश्य ही प्रभावित होगा। अब निगाह इस बात पर है कि शिकायतों के बाद निगम और जिला प्रशासन निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।