फोरलेन बनाएं, लेकिन गरीबों की रोजी-रोटी उजाड़कर नहीं : जयसिंह

परसाभाठा पहुंचे पूर्व मंत्री, दुकानदारों और रहवासियों से की चर्चा;बोले-जरूरत हो तो BALCO अपनी बाउंड्री पीछे करे

कोरबा।बजरंग चौक–परसाभाठा मार्ग को फोरलेन किए जाने की प्रस्तावित योजना को लेकर स्थानीय छोटे दुकानदारों और रहवासियों की चिंताओं के बीच पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने गुरुवार को परसाभाठा क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने बाजार चौक में स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस मार्ग के 2.20 किलोमीटर हिस्से को फोरलेन बनाने के लिए बालको प्रबंधन की ओर से सीएसआर मद से 29.98 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।

बाजार चौक में लोगों को संबोधित करते हुए अग्रवाल ने कहा कि वे सड़क और क्षेत्र के विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन सड़क निर्माण की योजना में प्रभावित परिवारों और छोटे दुकानदारों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

उनका कहना था कि वर्षों से छोटी दुकानों के माध्यम से परिवार चलाने वाले लोगों के लिए दुकान हटना उनकी आजीविका प्रभावित होने का कारण बन सकता है।

‘फोरलेन हो या सिक्सलेन, विकल्पों पर भी हो विचार’
पूर्व मंत्री ने कहा कि सड़क को फोरलेन या आवश्यकता के अनुसार सिक्सलेन बनाया जाए, लेकिन इसके लिए प्रभावित छोटे दुकानदारों और रहवासियों को हटाना ही एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने सड़क की डिजाइन और उपलब्ध भूमि की स्थिति का दोबारा परीक्षण करने की बात कही।

अग्रवाल ने सुझाव दिया कि यदि सड़क के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है तो BALCO प्रबंधन की बाउंड्री की ओर उपलब्ध विकल्पों की भी तकनीकी रूप से जांच की जानी चाहिए। उनके अनुसार, बाउंड्री को आवश्यकतानुसार पीछे करने की संभावना पर विचार होने से सड़क विस्तार और स्थानीय लोगों की आजीविका दोनों पहलुओं को साथ लेकर समाधान तलाशा जा सकता है।

स्थानीय लोगों से संवाद की मांग
उन्होंने BALCO प्रबंधन और प्रशासन से प्रभावित नागरिकों के साथ संवाद स्थापित करने की मांग की। अग्रवाल ने कहा कि सड़क निर्माण से पहले प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति, दुकानों और आवासों पर पड़ने वाले असर तथा वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि बजरंग चौक से परसाभाठा होते हुए रिंग रोड स्थित टाटा मोटर्स तक करीब 2.20 किलोमीटर सड़क को फोरलेन बनाने की परियोजना सामने आई है। जिला प्रशासन ने इसके निर्माण के लिए नगर निगम को कार्यदायी संस्था बनाए जाने की जानकारी भी पूर्व में जारी की थी।

स्थानीय दुकानदारों और रहवासियों की मांग है कि सड़क विकास के साथ उनके घर और रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव का भी समाधान निकाला जाए। वहीं, परियोजना के आगे बढ़ने के साथ भूमि सीमा और प्रभावित संपत्तियों को लेकर स्थिति प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट होना बाकी है।