मोबाइल-टीवी के जरिए घरों तक पहुंच रही ‘पूतना’ जैसी वृत्ति : अतुल कृष्ण

कोरबा। स्थानीय जश्न रिसॉर्ट में सिंघानिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने पूतना प्रसंग के माध्यम से आधुनिक जीवन में बढ़ती नकारात्मक प्रवृत्तियों के प्रति लोगों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि आज समाज में हजारों पूतनाएं जीवित हैं। भगवान किसी का संहार नहीं करते, बल्कि अविद्या और अज्ञान रूपी राक्षसी प्रवृत्तियों से मुक्त कर तारते हैं।

उन्होंने कहा कि पूतना को केवल एक पात्र के रूप में देखने के बजाय उसके प्रतीकात्मक अर्थ को समझने की आवश्यकता है। आज पूतना रूपी वृत्ति अखबार, मोबाइल और टीवी सहित विभिन्न माध्यमों से घर-परिवार तक पहुंच रही है और इसका प्रभाव पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन पर पड़ रहा है। इसलिए यह तय करना जरूरी है कि हम क्या देख रहे हैं, क्या पढ़ रहे हैं, क्या सुन रहे हैं और किस प्रकार का भोजन ग्रहण कर रहे हैं।

कथा के दौरान उन्होंने वसुदेव और नंदबाबा के मिलन प्रसंग का वर्णन करते हुए सच्ची मित्रता का अर्थ भी समझाया।

उन्होंने कहा कि सच्चा मित्र वही है, जो मित्र के कष्ट को अपना कष्ट समझकर उसे दूर करने का प्रयास करे। वहीं व्यक्तिगत कष्टों की चर्चा मित्र के सामने करने से बचना चाहिए।

कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य जिस भाव से भगवान का स्मरण करता है, भगवान उसी भाव से उसके हृदय में स्थान ग्रहण करते हैं। भगवान केवल भक्त का भाव देखते हैं।

उन्होंने भगवान के बालस्वरूप की पूजा और सेवा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बालस्वरूप की आराधना निस्वार्थ भाव से होती है, जिसमें किसी प्रकार की अपेक्षा नहीं रहती।