निदेशक तकनीकी रमेश चंद्र महापात्र ने खदान के पांच पैचों का किया निरीक्षण,साइलो-1से4और ईसी- एफसी की भी समीक्षा
कोरबा। एसईसीएल की गेवरा खदान में उत्पादन और कोयला डिस्पैच को गति देने के लिए प्रबंधन ने मैदानी निगरानी बढ़ा दी है।
एसईसीएल के निदेशक (तकनीकी-संचालन) रमेश चंद्र महापात्र ने गेवरा क्षेत्र का दौरा कर विभागीय और संविदा खनन कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप काम में तेजी लाने के साथ कोयले के सुचारू डिस्पैच पर विशेष जोर दिया।
निदेशक तकनीकी ने पीएनसी, देव माइनिंग, सैनिक माइनिंग, विभागीय और बथोरा पैच का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर अधिकारियों से उत्पादन, खनन गतिविधियों और डिस्पैच की प्रगति की जानकारी ली। इसके साथ ही साइलो-1, 2, 3 और 4 से संबंधित कार्यों की समीक्षा की तथा ईसी/एफसी से जुड़े मामलों की स्थिति भी जानी।
बारिश थमते ही बढ़ा उत्पादन-डिस्पैच
बारिश के बाद खनन गतिविधियों में तेजी आने से कोरबा जिले के एसईसीएल क्षेत्रों में उत्पादन और डिस्पैच ने रफ्तार पकड़ी है। रविवार को कोरबा एरिया ने 17.30 हजार टन उत्पादन किया, जबकि दैनिक लक्ष्य 14.47 हजार टन था। कुसमुंडा ने 78.21 हजार टन उत्पादन कर 69.26 हजार टन के लक्ष्य को पार किया। दीपका में 73.08 हजार टन उत्पादन हुआ, जबकि लक्ष्य 71 हजार टन था। गेवरा में 100.06 हजार टन उत्पादन दर्ज किया गया।
डिस्पैच में भी बेहतर स्थिति रही। कोरबा एरिया से 21.43 हजार टन, कुसमुंडा से 101.44 हजार टन, गेवरा से 108.87 हजार टन और दीपका से 86.48 हजार टन कोयला भेजा गया।
मैदानी निगरानी और समन्वय पर जोर
महापात्र ने अधिकारियों को विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्पादन और डिस्पैच की प्रक्रिया में बाधा न आए, इसके लिए मैदानी स्तर पर लगातार निगरानी और समस्याओं का समयबद्ध समाधान जरूरी है। निरीक्षण के दौरान गेवरा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
Editor – Niraj Jaiswal
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