बालको की सामुदायिक विकास कार्य बनी सामाजिक बदलाव की मजबूत कड़ी

बालकोनगर। किसी किसान के खेत में दूसरी-तीसरी फसल का रास्ता खुले, महिला के हुनर से परिवार की आय बढ़े, युवा कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जुड़े और बच्चों को बेहतर शिक्षा, पोषण व स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें तो विकास आंकड़ों से निकलकर लोगों के जीवन में दिखाई देने लगता है। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की सामुदायिक विकास पहल इसी सोच के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक अधोसंरचना और खेल के माध्यम से बदलाव की दिशा में काम कर रही है।

वित्तवर्ष 2026 में बालको की सामुदायिक विकास पहलों का लाभ 123 गांवों के करीब 1.80 लाख लोगों तक पहुंचा। कंपनी ने मानव जीवन चक्र आधारित दृष्टिकोण के तहत बच्चों से लेकर युवाओं, महिलाओं, किसानों और परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम संचालित किए।

शिक्षा और बाल विकास पर जोर
नंद घरों के माध्यम से बच्चों के लिए बेहतर सीखने, पोषण और स्वास्थ्य का वातावरण तैयार किया गया। वित्तवर्ष 2026 में 111 नंद घरों से बच्चों और माताओं को लाभ मिला। वहीं 7,226 विद्यार्थियों को डिजिटल कक्षाओं का सहयोग मिला और 800 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया। चिन्हित कुपोषित बच्चों में 75 प्रतिशत में स्वास्थ्य सुधार दर्ज किया गया।

बालको कनेक्ट कोचिंग कार्यक्रम के तहत कोरबा और कवर्धा में दो केंद्र संचालित किए गए। वित्तवर्ष 2026 में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 84 अभ्यर्थियों का सरकारी सेवाओं में चयन हुआ।

सिंचाई से किसानों की बढ़ी आय
‘मोर जल मोर माटी’ कार्यक्रम के तहत 40 गांवों के 9,420 किसानों तक पहल पहुंची। 1,400 एकड़ से अधिक कृषि भूमि के लिए सिंचाई सुरक्षा मजबूत की गई। आधुनिक और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने से किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ी। कंपनी के अनुसार किसानों की औसत कृषि आय में करीब 50 प्रतिशत वृद्धि और खेती की लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। जल सुरक्षा से 3,000 से अधिक किसानों ने दूसरी और तीसरी फसल लेना शुरू किया।

कौशल प्रशिक्षण से रोजगार का रास्ता
वेदांता स्किल स्कूल के कोरबा, कवर्धा और सरगुजा केंद्रों में वित्तवर्ष 2026 के दौरान 1,202 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से 82 प्रतिशत युवाओं ने रोजगार या उद्यमिता से जुड़ाव हासिल किया। प्रशिक्षण लेने वालों में 61 प्रतिशत महिलाएं और 59 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों से रहे।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
उन्नति परियोजना के तहत वित्तवर्ष 2026 में 40 नए स्वयं सहायता समूह बनाए गए। इसके साथ समूहों की कुल संख्या बढ़कर 561 और सदस्य महिलाओं की संख्या 6,003 हो गई। 19 समूहों को बैंक से जोड़कर करीब 27 लाख रुपये का ऋण सहयोग उपलब्ध कराया गया।

उनाटेक्स, डेकोराती, छत्तीसा, क्लिनला, मशरूम उत्पादन और कोसाकारी जैसे उद्यमों से 600 से अधिक महिलाएं जुड़ीं और करीब 20 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। 21 सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से 104 महिलाओं को अतिरिक्त आय का अवसर मिला।

कोसा बुनकरों को बाजार से जोड़ने की पहल
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कोसा कला को बाजार से जोड़ने के लिए धनगांव में कोसा बुनाई प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया। यहां 20 महिला बुनकरों को प्रशिक्षण दिया गया।

‘कोसाकारी’ ब्रांड और डिजिटल मंच की शुरुआत से स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

स्वास्थ्य सेवाएं गांवों तक पहुंचीं
‘आरोग्य’ परियोजना के तहत वित्तवर्ष 2026 में 93,442 लोगों तक सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचीं। तीन ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में 4,799 मरीजों को ओपीडी सुविधा मिली। 65 आंगनबाड़ियों में 3,340 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई। दो मोबाइल स्वास्थ्य वाहनों ने 70 बस्तियों में सेवाएं दीं, जिनका 26,500 लोगों ने लाभ उठाया।

नवा रायपुर स्थित बालको मेडिकल सेंटर में भी सामुदायिक विकास सहायता के तहत बड़ी संख्या में मरीजों को उपचार मिला। वित्तवर्ष 2025-26 में यहां 2,800 सर्जरी, 16,891 कीमोथेरेपी और 1,635 रेडियोथेरेपी उपचार किए गए। केंद्र में दा विंची एक्सआई रोबोट आधारित कैंसर शल्य चिकित्सा प्रणाली भी स्थापित की गई।

सामुदायिक सुविधाओं का विस्तार
बुनियादी सुविधाओं के तहत चार सामुदायिक भवन, 12 सामुदायिक शौचालय और दो सामुदायिक मंचों का निर्माण किया गया। इनसे 7,500 से अधिक लोगों को लाभ मिला।

तीरंदाजी में युवाओं को अवसर
‘लक्ष्यवेद-बालको तीरंदाजी’ कार्यक्रम के तहत 29 स्कूलों में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। 1,200 से अधिक विद्यार्थियों की जांच हुई, जिसमें 70 प्रतिभागियों ने चयन परीक्षण में सफलता हासिल की।

बालको के अनुसार सामुदायिक विकास का उद्देश्य केवल परियोजनाओं को पूरा करना नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। किसान, महिला, युवा और बच्चों की क्षमता को मजबूत कर उन्हें अपने भविष्य के निर्माण में भागीदार बनाना ही इन पहलों का प्रमुख लक्ष्य है।