NH-130 पर  मवेशियों का डेरा, हादसों का बढ़ा खतरा

पोड़ी से कटघोरा होते चकचकवा तक सड़क पर शाम होते ही बढ़ जाता है जमावड़ा

कोरबा। राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर ग्राम पोड़ी से कटघोरा होते हुए चकचकवा तक सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग पर करीब 300 से अधिक मवेशी सड़क पर बैठे और विचरण करते नजर आते हैं। शाम होते ही इनकी संख्या और बढ़ जाती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

सड़क पर बैठे मवेशी कई बार अचानक वाहनों के सामने आ जाते हैं। उन्हें बचाने के प्रयास में वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है या वाहन का रुख बदलना पड़ता है।

इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस मार्ग पर मवेशियों के कारण कई बार हादसे हो चुके हैं। दुर्घटनाओं में वाहन चालक और राहगीर जहां जोखिम में रहते हैं, वहीं कई मवेशी भी वाहनों की चपेट में आकर घायल हुए हैं और जान गंवा चुके हैं।

शाम होते ही सड़क बन जाती है मवेशियों का डेरा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आसपास के क्षेत्रों में खुले में विचरण करने वाले मवेशी भोजन और पानी की तलाश में राजमार्ग तक पहुंच जाते हैं। दिनभर सड़क किनारे घूमने के बाद शाम होते ही बड़ी संख्या में मवेशी सड़क पर बैठ जाते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच इनका सड़क पर मौजूद रहना किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

लोगों का आरोप है कि मवेशी पालक उन्हें खुले में छोड़ देते हैं और उनकी देखरेख नहीं करते। इसका खामियाजा वाहन चालकों के साथ बेजुबान पशुओं को भी भुगतना पड़ रहा है।

सिर्फ मवेशी हटाने से नहीं होगा स्थायी समाधान
नागरिकों का कहना है कि समय-समय पर सड़क से मवेशियों को हटाने की कार्रवाई किए जाने के बावजूद समस्या दोबारा खड़ी हो जाती है। स्थायी समाधान के लिए खुले में मवेशी छोड़ने वाले पालकों की पहचान कर उनकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। नियमानुसार कार्रवाई होने पर ही पालकों में जिम्मेदारी का भाव आएगा और मवेशियों को राजमार्ग पर छोड़ने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।

बड़े हादसे से पहले कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और संबंधित निकाय से संयुक्त अभियान चलाकर NH-130 को मवेशियों के जमावड़े से मुक्त कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय अभी से ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इससे वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ बेजुबान मवेशियों की जान भी बचाई जा सकेगी।