आधुनिक खेती से पुष्पेन्द्र ने बदली तकदीर, करेला उत्पादन से कमाया 1.60 लाख का मुनाफा

राष्ट्रीय बागवानी मिशन का मिला लाभ, 0.800 हेक्टेयर में 60 क्विंटल उत्पादन कर गांव के किसानों के लिए बने प्रेरणास्रोत

कोरबा। खेती को लाभ का जरिया बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और उद्यानिकी फसलों को अपनाने की दिशा में किसान अब तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा के ग्राम नगोई बछेरा के किसान पुष्पेन्द्र कुमार पिता अजय कुमार ने भी पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए आधुनिक तकनीक से सब्जी उत्पादन को अपनाया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मिले मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने करेला की खेती कर बेहतर उत्पादन हासिल किया और करीब 1.60 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।

पारंपरिक खेती में मेहनत ज्यादा, आमदनी कम
पुष्पेन्द्र कुमार लंबे समय से खेती-किसानी से जुड़े हैं। पहले वे अपने खेतों में पारंपरिक तरीके से सब्जियों का उत्पादन करते थे। इस पद्धति में मेहनत और लागत के बावजूद अपेक्षित उत्पादन एवं आमदनी नहीं हो पाती थी। इससे खेती से मिलने वाला लाभ सीमित रहता था।

इसी बीच उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने पर उन्हें आधुनिक सब्जी उत्पादन की जानकारी मिली। उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन का लाभ उठाते हुए खेती के तौर-तरीकों में बदलाव करने का निर्णय लिया।

0.800 हेक्टेयर में करेला की खेती, मिला 60 क्विंटल उत्पादन
पुष्पेन्द्र कुमार के पास कुल 4.385 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें करीब 4 हेक्टेयर सिंचित तथा 0.385 हेक्टेयर असिंचित भूमि है। उन्होंने योजना के तहत 0.800 हेक्टेयर क्षेत्र में करेला की खेती की। आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने का परिणाम बेहतर रहा और उन्हें करीब 60 क्विंटल करेला उत्पादन प्राप्त हुआ।

उत्पादन की बेहतर गुणवत्ता और बाजार से प्राप्त आय के चलते इस गतिविधि से उन्हें लगभग 1.60 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। अतिरिक्त आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया और खेती के प्रति उनका भरोसा भी बढ़ा।

दूसरे किसानों को भी आधुनिक खेती अपनाने की प्रेरणा
पुष्पेन्द्र कुमार का कहना है कि पहले वे सामान्य तरीके से खेती करते थे, लेकिन उद्यानिकी विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग से उन्हें आधुनिक पद्धति अपनाने का अवसर मिला। नई तकनीक से उत्पादन बेहतर हुआ और खेती से मिलने वाला लाभ भी बढ़ा।

आज पुष्पेन्द्र कुमार अपने गांव में आधुनिक उद्यानिकी खेती की सफल मिसाल बनकर सामने आए हैं। उनका अनुभव बताता है कि कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए तो खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है।