बारिश में बेहाल कोरबा, जलभराव ने खोली निकासी व्यवस्था की पोल

नालियां और नाले जाम, कई इलाकों में सड़कों से घर-दुकानों तक पहुंचा पानी सीतामणी में 100 से अधिक घर जलभराव की चपेट में

कोरबा। मानसून की बारिश के साथ ही कोरबा शहर में जलभराव की समस्या एक बार फिर गंभीर होती दिखाई दे रही है। शहर के कई मोहल्लों और कॉलोनियों में नालियों का पानी सड़कों पर बहने लगा है। कुछ स्थानों पर बारिश और नालियों का पानी घरों व दुकानों तक पहुंच गया। नदी-नालों के किनारे बसे इलाकों में भी जल निकासी व्यवस्था को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

कोरबा में जलभराव की समस्या नई नहीं है। हर साल मानसून के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में पानी जमा होने की स्थिति बनती है। बारिश के दौरान नगर निगम का अमला नालियों की सफाई और पानी निकासी के लिए सक्रिय होता है, लेकिन बारिश थमने के बाद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित काम नहीं होने से अगले मानसून में हालात फिर सामने आ जाते हैं।

शहर के तेजी से विस्तार और बढ़ते निर्माण के बीच कई स्थानों पर नालियों के ऊपर निर्माण, नालों के किनारे अतिक्रमण तथा नालियों में मलबा जमा होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई जगह नालियां संकरी हैं और अधिक बारिश होने पर पानी का दबाव नहीं संभाल पातीं।

ऐसे में बारिश का पानी सड़कों पर जमा होकर लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है।

नगर निगम क्षेत्र के 67 वार्डों में जलभराव की स्थिति अलग-अलग है, लेकिन कई इलाकों में मूल समस्या पर्याप्त और व्यवस्थित जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी हुई है।

तत्काल राहत के लिए बारिश के दौरान पानी निकालना जरूरी है, वहीं स्थायी समाधान के लिए शहर की जल निकासी व्यवस्था का व्यापक सर्वे कराया जाना भी जरूरी है।

इस सर्वे में उन स्थानों को चिन्हित किया जाना चाहिए, जहां हर साल जलभराव होता है। साथ ही बंद या संकरे नालों, अतिक्रमण के कारण बाधित प्राकृतिक जल प्रवाह तथा ऐसे स्थानों की पहचान जरूरी है, जहां नालियों और नालों की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है। निर्माण के कारण यदि कहीं पानी का प्राकृतिक रास्ता बाधित हुआ है तो उसे बहाल करने के साथ अधूरे नाला-नाली निर्माण को भी पूरा कराने की जरूरत है।

अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी
शहर में जलभराव की समस्या केवल नगर निगम प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है।वार्ड पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अपने-अपने क्षेत्रों में जलभराव वाले स्थानों, जाम नालियों, अतिक्रमण और आवश्यक निर्माण कार्यों की जानकारी जनप्रतिनिधियों को होती है। ऐसे में इन समस्याओं को निगम के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाकर स्थायी समाधान के लिए प्रयास किया जाना जरूरी है।

नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडे द्वारा शहर की व्यवस्थाओं में सुधार और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि कोरबा जैसे तेजी से विस्तार कर रहे शहर में जल निकासी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के समन्वित प्रयास की आवश्यकता है। बारिश से पहले नालों और नालियों की सफाई तथा जल निकासी की तैयारियों को नियमित व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना भी जरूरी है।

प्राचीन राम गुफा में भी घुसा पानी

लगातार हो रही बारिश के बीच कोरबा शहर का प्रमुख नाला उफान पर आ गया। नाले का पानी सीतामणी बस्ती के वैष्णो दरबार मोहल्ला, केवट मोहल्ला सहित आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में घुस गया। बताया जा रहा है कि 100 से अधिक घर जलभराव की चपेट में आए हैं। वहीं प्राचीन राम गुफा मंदिर परिसर में भी पानी पहुंचने से लोगों में हड़कंप की स्थिति बन गई।

अचानक बढ़े जलस्तर के कारण स्थानीय लोगों को घरों से पानी निकालने और घरेलू सामान को सुरक्षित स्थानों पर रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। जलभराव के कारण लोगों के रोजमर्रा के कामकाज पर भी असर पड़ा है। स्थानीय लोगों ने जल निकासी की स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग की है।