शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप; बीआरसीसी और शिक्षक के खिलाफ एफआईआर
कोरबा।शिक्षा विभाग में कथित फर्जी बीएड प्रमाण पत्र के जरिए पदोन्नति हासिल करने की शिकायत का विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता व्याख्याता ने आरोप लगाया है कि शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के दौरान उसके साथ गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और बेल्ट से मारपीट की गई। मामले में सिविल लाइन रामपुर पुलिस ने विकासखंड स्त्रोत समन्वयक (बीआरसीसी) अनिल रात्रे और शासकीय शिक्षक मुकुंद केशव उपाध्याय के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पदोन्नति प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़मार में पदस्थ व्याख्याता एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष ओमप्रकाश बघेल ने अनिल रात्रे और मुकुंद केशव उपाध्याय के खिलाफ कथित रूप से कूटरचना कर फर्जी बीएड प्रमाण पत्र के माध्यम से पदोन्नति सूची में नाम शामिल कराने की शिकायत की थी।
शिकायत मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव, डीपीआई रायपुर के संचालक और संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी गई थी। शिकायत के बाद मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने लगा।
बैठक के बाद शिकायत वापस लेने का दबाव
शिकायतकर्ता के अनुसार 22 अगस्त को बीआरसी भवन अंधरीकछार में शिक्षक संघर्ष मोर्चा की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें विभिन्न शैक्षणिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ ओमप्रकाश बघेल, शिक्षक मुकुंद उपाध्याय और बीआरसीसी अनिल रात्रे भी मौजूद थे।
आरोप है कि बैठक समाप्त होने के बाद शाम करीब 5 से 5.30 बजे के बीच दोनों ने पूर्व में की गई शिकायत वापस लेने के लिए ओमप्रकाश बघेल पर दबाव बनाया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी दौरान गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई तथा बेल्ट निकालकर मारपीट की गई।
बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज
शिकायत के आधार पर सिविल लाइन रामपुर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 296, 351(3) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना की जा रही है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब पदोन्नति मामले की जांच पर भी नजर
मारपीट के मामले के साथ ही कथित फर्जी बीएड प्रमाण पत्र और पदोन्नति प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप भी चर्चा में आ गए हैं। ऐसे में अब संबंधित दस्तावेजों की जांच और पदोन्नति प्रक्रिया में प्रमाण पत्रों की वैधता को लेकर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर भी नजर रहेगी।
फिलहाल पुलिस ने मारपीट और धमकी के आरोपों में मामला दर्ज किया है। फर्जी प्रमाण पत्र के आरोपों की सत्यता संबंधित विभागीय जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
Editor – Niraj Jaiswal
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