स्कूल भवनों के भरोसे चल रही कक्षाएं, 22 कॉलेजों के भवन स्वीकृत फिर भी कोरबा के चार कॉलेज सूची से बाहर
कोरबा। जिले के चार शासकीय कॉलेजों को अपने भवन के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। जटगा, बांकीमोंगरा, उमरेली और रामपुर में कॉलेजों की स्थापना तो कर दी गई है, लेकिन अब तक इनके लिए अलग भवन उपलब्ध नहीं हो सका है। नतीजतन इन कॉलेजों की कक्षाएं स्कूल भवनों में संचालित की जा रही हैं। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित 22 शासकीय कॉलेजों के लिए नए भवनों को मंजूरी दिए जाने के बावजूद कोरबा के इन चार कॉलेजों को सूची में स्थान नहीं मिला है।
सरकार ने 22 कॉलेजों के भवन निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है। ऐसे में कोरबा के चार कॉलेजों को इस सूची से बाहर रखे जाने पर विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों में निराशा है। इसे लेकर प्रशासनिक उपेक्षा के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
स्थापना हो गई, लेकिन भवन अब तक नहीं
जटगा, बांकीमोंगरा, उमरेली और रामपुर में उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कॉलेज शुरू किए गए। कॉलेज खुलने से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा का अवसर तो मिला, लेकिन अलग भवन नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई की व्यवस्था अब भी स्कूल भवनों पर निर्भर है।
स्कूल और कॉलेज की कक्षाओं के लिए उपलब्ध सीमित कमरों का इस्तेमाल होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लाइब्रेरी, प्रयोगशाला और अन्य सुविधाओं की कमी
कॉलेजों के लिए अलग भवन नहीं होने का असर केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है। पर्याप्त प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, कार्यालय, स्टाफ रूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं का अभाव भी विद्यार्थियों के लिए चुनौती बना हुआ है। सीमित संसाधनों में उच्च शिक्षा की पढ़ाई संचालित होने से शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के इन कॉलेजों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ऐसे में बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए कॉलेजों को जल्द से जल्द अपना भवन उपलब्ध कराने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
22 कॉलेजों को भवन, कोरबा के चार क्यों छूटे?
प्रदेश में 22 कॉलेजों के लिए नए भवनों को मंजूरी मिलने के बाद अब जिलेवासियों का सवाल है कि जब कोरबा के चार कॉलेज लंबे समय से स्कूल भवनों में संचालित हो रहे हैं, तो इन्हें नवीन भवन स्वीकृति की सूची में शामिल क्यों नहीं किया गया?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन कॉलेजों की जरूरत पहले से स्पष्ट है। विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए अलग भवन की मांग भी लगातार उठती रही है। इसके बावजूद नवीन स्वीकृति में जिले के किसी भी कॉलेज को स्थान नहीं मिलना चिंता का विषय है।
बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
बारिश के मौसम में स्कूल भवनों में संचालित कॉलेजों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। सीमित कमरों और पुराने संसाधनों के बीच विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कॉलेजों के लिए स्वतंत्र और सुविधायुक्त भवन की जरूरत और अधिक महसूस होती है।
उच्च शिक्षा के विस्तार के दावे पर सवाल
सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा का विस्तार करने के लिए नए कॉलेज खोलने की पहल सराहनीय है, लेकिन कॉलेज खोलने के साथ-साथ स्थायी भवन और आवश्यक अधोसंरचना उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। जिले के चार कॉलेजों की वर्तमान स्थिति इसी आवश्यकता की ओर इशारा करती है।
अब देखना होगा कि आगामी भवन स्वीकृतियों में जटगा, बांकीमोंगरा, उमरेली और रामपुर के इन चार कॉलेजों को कब तक शामिल किया जाता है, ताकि विद्यार्थियों को स्कूल भवन के बजाय अपने कॉलेज का स्वतंत्र और सुविधायुक्त परिसर मिल सके।
Editor – Niraj Jaiswal
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