लंबित बिलों को लेकर ठेकेदार यूनियन ने निगम पर लगाए गंभीर आरोप, कहा भुगतान प्रक्रिया में बेवजह अड़ंगे
कोरबा।नगर निगम क्षेत्र में पार्षद निधि सहित विभिन्न योजनाओं के तहत कराए गए निर्माण कार्यों का भुगतान लंबे समय से लंबित होने का मामला सामने आया है। ठेकेदारों का कहना है कि पार्षद निधि वर्ष 2024-25 के कई कार्यों का भुगतान करीब दो वर्ष से अटका हुआ है। बाजार में बढ़ती देनदारी और लंबित बिलों के कारण ठेकेदार आर्थिक दबाव में हैं।
ठेकेदार यूनियन ने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक रूप से अड़चन डालने और परेशान करने का आरोप लगाया है। यूनियन के मुताबिक ई-निविदा और मैनुअल निविदा से लेकर कार्यादेश जारी करने तथा कार्यस्थल उपलब्ध कराने तक कई स्तरों पर ऐसी शर्तें और प्रक्रियाएं लागू की जा रही हैं, जिससे काम प्रभावित हो रहा है।
बिल से भुगतान तक प्रक्रिया में देरी का आरोप
ठेकेदारों का आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद बिल तैयार कराने से लेकर उसे आगे बढ़ाने और भुगतान जारी करने तक अनावश्यक देरी की जा रही है। कई ठेकेदारों के लाखों रुपये के भुगतान लंबित होने से उन्हें कर्मचारियों, सामग्री आपूर्तिकर्ताओं और बाजार की देनदारियां चुकाने में परेशानी हो रही है।
यूनियन का कहना है कि निगम के विभिन्न मदों में राशि उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है। अधोसंरचना, स्वच्छ भारत मिशन 2.0, मरम्मत-संधारण तथा मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण से संबंधित कार्यों के भुगतान को लेकर भी ठेकेदारों में नाराजगी है।
रॉयल्टी क्लियरेंस और पेनाल्टी पर भी सवाल
ठेकेदार यूनियन ने रॉयल्टी क्लियरेंस से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भुगतान लंबित रहने के बावजूद रॉयल्टी क्लियरेंस नहीं होने पर पेनाल्टी लगाए जाने की प्रक्रिया समझ से परे है। ठेकेदारों का कहना है कि जब उनके बिल ही समय पर स्वीकृत और भुगतान नहीं किए जा रहे हैं तो अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने से उनकी परेशानी और बढ़ रही है।
टेंडर की शर्तों पर भी उठाए सवाल
यूनियन ने पिछले एक वर्ष के दौरान ई-निविदाओं और मैनुअल निविदाओं में लगाई जा रही कुछ विशेष शर्तों पर भी आपत्ति जताई है। आरोप है कि टेंडर में ऐसी विशेष कंडिकाएं जोड़ी जा रही हैं, जिनसे प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
यूनियन ने आशंका जताई है कि कुछ विशेष शर्तें किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने की मंशा से तैयार की जा रही हैं। हालांकि इन आरोपों पर निगम प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक मामला ले जाने की चेतावनी
ठेकेदार यूनियन का कहना है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। यदि लंबित भुगतान और निविदा प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो मामले को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के समक्ष रखा जाएगा।
ठेकेदारों का कहना है कि विकास कार्यों को समय पर पूरा कराने के लिए भुगतान प्रक्रिया भी सुचारु होना जरूरी है। लंबे समय तक भुगतान अटकने से न केवल ठेकेदार आर्थिक संकट में आते हैं, बल्कि भविष्य में निगम के विकास कार्यों की गति पर भी इसका असर पड़ सकता है।


Editor – Niraj Jaiswal
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