बढ़ती लागत और घटते मालभाड़े से नाराज, ट्रांसपोर्टरों ने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया, ‘पहिया जाम’ की चेतावनी

कोरबा। परिवहन कारोबार में लगातार बढ़ती परिचालन लागत और घटते मालभाड़े के विरोध में छत्तीसगढ़ के ट्रांसपोर्टरों ने आंदोलन का ऐलान किया है। बिलासपुर के व्यापार विहार स्थित ट्रक मालिक संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांतीय कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश के सभी 33 जिलों से ट्रक, हाइवा, ट्रेलर और अन्य व्यावसायिक वाहन मालिक शामिल हुए। बैठक में न्यूनतम मालभाड़ा तय करने सहित विभिन्न मांगों पर गहन चर्चा की गई।

ट्रक मालिक संघ ने शासन-प्रशासन और संबंधित औद्योगिक संस्थानों के समक्ष मांगें रखते हुए समाधान के लिए 15 दिन का समय दिया है। संघ का कहना है कि निर्धारित अवधि में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर प्रदेशभर में माल ढुलाई बंद कर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से ‘पहिया जाम’ आंदोलन किया जाएगा।

वास्तविक परिचालन लागत के अनुरूप मालभाड़े की मांग
संघ के अनुसार उनका उद्देश्य परिवहन कारोबार बंद करना नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें वाहन मालिकों को वास्तविक परिचालन लागत के अनुरूप मालभाड़ा मिल सके। संघ ने कहा कि कम मालभाड़े के कारण छोटे वाहन मालिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और बैंक की किस्तों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

संघ ने अपनी मांगों की प्रतियां मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव/आयुक्त तथा बिलासपुर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को भेजने की जानकारी दी है।

एंट्री और नकद वसूली का मुद्दा भी उठा
बैठक में प्रदेश के प्रमुख मार्गों और सीमा क्षेत्रों में मैकेनिकल एवं एंट्री के नाम पर बिना पक्की रसीद के नकद वसूली किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। ट्रक मालिकों ने ऐसी वसूली पर रोक लगाने और केवल अधिकृत एवं पारदर्शी प्रक्रिया से शुल्क वसूली सुनिश्चित करने की मांग की।

इसके साथ ही डीजल और टोल दरों में बदलाव के अनुपात में मालभाड़े की हर तिमाही समीक्षा एवं पुनरीक्षण की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। संघ ने कथित अवैध वसूली पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी रखी।

30 से 40 फीसदी मालभाड़ा घटने का दावा
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि डीजल, टायर, स्पेयर पार्ट्स, ग्रीस-ऑयल, वाहन बीमा, आरटीओ टैक्स और राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल की बढ़ती दरों से वाहनों की परिचालन लागत में 35 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद उद्योगों, बड़े संयंत्रों और बिचौलियों के स्तर पर मालभाड़ा परिचालन लागत से भी 30 से 40 फीसदी नीचे किए जाने का दावा संघ ने किया है।

संघ के अनुसार कम मालभाड़े के कारण छोटे वाहन मालिकों पर बैंक किस्तों का दबाव बढ़ गया है। संगठन ने दावा किया कि बड़ी संख्या में छोटे वाहन मालिक समय पर किस्त नहीं चुका पा रहे हैं और कई वाहन जब्ती की स्थिति में पहुंच गए हैं। इसका असर वाहन मालिकों के साथ-साथ चालकों और परिचालकों की आजीविका पर भी पड़ रहा है।

15 दिन बाद तय होगी आंदोलन की दिशा
ट्रक मालिक संघ ने स्पष्ट किया है कि 15 दिन की समय-सीमा में मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर प्रदेशव्यापी माल ढुलाई बंद और पहिया जाम आंदोलन किया जाएगा। संघ ने इसे अपने हक और परिवहन कारोबार को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाए रखने की दिशा में लोकतांत्रिक संघर्ष बताया है।