आवास घोटाला: उपाध्यक्ष के बाद अब अध्यक्ष के क्षेत्र में भी फर्जी जियो टैगिंग का आरोप

अधूरे मकानों को पूर्ण दर्शाकर भुगतान, निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

कोरबा। प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित फर्जी जियो टैगिंग के जरिए अधूरे मकानों को पूर्ण दर्शाकर सरकारी राशि का भुगतान किए जाने के आरोप अब एक से अधिक पंचायतों से सामने आने लगे हैं। जनपद पंचायत करतला के उपाध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र के बाद अब जनपद अध्यक्ष श्रीमती अशोका बाई कंवर के निर्वाचन क्षेत्र की ग्राम पंचायत गाड़ापाली से भी इसी तरह का मामला सामने आया है।

लगातार सामने आ रही शिकायतों ने योजना की निगरानी और सत्यापन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत कराईनारा के आश्रित ग्राम भेलवागुड़ी में हितग्राही गंगा राम पिता विशाल दास के नाम स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास का निर्माण अधूरा होने के बावजूद रिकॉर्ड में उसे पूर्ण दर्शाया गया। हितग्राही को प्रथम किश्त के रूप में 40 हजार, द्वितीय किश्त 55 हजार और तृतीय किश्त 25 हजार रुपये सहित मनरेगा मजदूरी मद की राशि का भुगतान किए जाने का उल्लेख है।

आरोप है कि किसी अन्य मकान की तस्वीरों का जियो टैग कर आवास को पूर्ण दिखाते हुए राशि का आहरण कराया गया।

अध्यक्ष के क्षेत्र की पंचायत से भी शिकायत
इसी तरह ग्राम पंचायत गाड़ापाली में हितग्राही अनिल कुमार महंत पिता मदन दास महंत के नाम स्वीकृत आवास को लेकर भी शिकायत सामने आई है। शिकायत के मुताबिक हितग्राही को 11 मार्च 2025 को प्रथम किश्त 40 हजार रुपये, 21 मई 2025 को द्वितीय किश्त 55 हजार रुपये तथा 23 जून 2026 को तृतीय किश्त 25 हजार रुपये का भुगतान किया गया। रिकॉर्ड में 10 मई 2026 को आवास निर्माण पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मौके पर मकान अब भी अधूरा है।

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि आवास को पूर्ण दिखाने के लिए फर्जी जियो टैगिंग का सहारा लिया गया और इसी आधार पर सरकारी राशि का भुगतान कराया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

जनप्रतिनिधियों के क्षेत्रों में ही निगरानी पर सवाल
उपाध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र के बाद अब जनपद अध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र से भी इसी तरह की शिकायत सामने आने से जनपद पंचायत की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आवास निर्माण की नियमित स्थल जांच और जियो टैगिंग का सही तरीके से सत्यापन किया गया होता तो अधूरे मकानों को पूर्ण दर्शाकर भुगतान की स्थिति नहीं बनती।

मिलीभगत की जांच और राशि वसूली की मांग
ग्रामीणों ने आवास मित्र, रोजगार सहायक, पंचायत सचिव सहित जनपद स्तर के संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि मिलीभगत के बिना इस तरह की अनियमितता संभव नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे विकासखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो ऐसे अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं।

शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ एफआईआर, गलत तरीके से भुगतान की गई राशि की वसूली तथा जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन मामलों की जांच किस स्तर पर कराता है और जांच में आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।