मां के अंतिम संस्कार के नाम पर ₹40 हजार की साइबर ठगी, इमोशनल ब्लैकमेल कर क्यूआर कोड से ऐंठी रकम, दो आरोपी गिरफ्तार

कोरबा। कोरबा जिले में साइबर ठगों ने इंसानियत की सारी हदें पार करते हुए एक व्यक्ति को परिचित की मां के निधन की झूठी सूचना देकर अंतिम संस्कार के नाम पर 40 हजार रुपये की ठगी कर ली। कोरबी पुलिस और साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

पुलिस के अनुसार, कोरबी क्षेत्र निवासी सुरेश चंद्र जायसवाल को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को उनका परिचित बताते हुए कहा कि उसकी मां का निधन हो गया है और अंतिम संस्कार के लिए तत्काल पैसों की आवश्यकता है। आरोपी ने इतनी भावनात्मक और विश्वसनीय बातचीत की कि पीड़ित को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। इसके बाद मोबाइल पर भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन कर सुरेश चंद्र ने 40 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए।

परिचित से बात हुई तो खुला ठगी का राज
राशि भेजने के कुछ समय बाद जब सुरेश चंद्र ने संबंधित परिचित से संपर्क किया तो पता चला कि उसकी मां पूरी तरह स्वस्थ हैं और उसने किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मांगी है। इसके बाद उन्हें साइबर ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने तत्काल कोरबी चौकी में शिकायत दर्ज कराई।

बैंक ट्रांजेक्शन से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
शिकायत के बाद पुलिस और साइबर सेल ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि ठगी की रकम जांजगीर-चांपा जिले के एक बैंक खाते में जमा हुई थी। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

मौत और बीमारी का बहाना बनाकर करते थे ठगी
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने के लिए मौत, बीमारी और दुर्घटना जैसी झूठी कहानियां गढ़ते थे। फर्जी मोबाइल नंबर और अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से क्यूआर कोड भेजकर तत्काल ऑनलाइन भुगतान करवाते थे, ताकि पीड़ित को सोचने का मौका न मिले।

दो आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए
पुलिस ने जांजगीर-चांपा जिले के उरदुमा निवासी आकाश यादव (28) और बोरतरी निवासी मयंक चौहान (22) को गिरफ्तार किया है। दोनों ने पूछताछ में अपराध स्वीकार कर लिया। उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) एवं 3(5) के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

पुलिस की अपील
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल, मैसेज या क्यूआर कोड के माध्यम से पैसे भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क कर जानकारी की पुष्टि अवश्य करें। किसी भी भावनात्मक कहानी पर भरोसा कर जल्दबाजी में ऑनलाइन लेन-देन न करें। साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन या निकटतम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।