मुआवजे से आगे बढ़े खदान प्रभावितों के अधिकार, नई माइनिंग व माइन क्लोजर गाइडलाइन से खुलेंगे विकास के नए रास्ते

Mining Plan-2025 और CBA Policy-2022 से पुनर्वास, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका को मिलेगा कानूनी आधार

कोरबा।भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा जारी Mining Plan एवं Mine Closure Plan Guidelines- 2025 तथा Coal Bearing Areas (CBA) Policy- 2022 ने खदान प्रभावित क्षेत्रों के विकास और प्रभावित परिवारों के अधिकारों को नई दिशा दी है। नई व्यवस्था के तहत अब खनन केवल कोयला उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, भूमि पुनर्वास, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्थानीय रोजगार, कौशल विकास और खदान बंद होने के बाद भूमि के जनहितकारी उपयोग को भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाएगा।

नई गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक खदान के लिए प्रोग्रेसिव माइन क्लोजर प्लान और फाइनल माइन क्लोजर प्लान तैयार करना अनिवार्य होगा। इसके तहत खनन कार्य के साथ-साथ भूमि सुधार, हरित क्षेत्र का विकास, जल संरक्षण और स्थानीय आधारभूत सुविधाओं के निर्माण का कार्य भी किया जाएगा। खदान बंद होने के बाद भूमि को कृषि, वानिकी, जलाशय अथवा अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए विकसित किया जाएगा।

सरकार ने फाइनेंशियल एश्योरेंस/एस्क्रो फंड की व्यवस्था भी लागू की है। यदि कोई कंपनी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करती है तो इसी निधि से भूमि पुनर्वास, पर्यावरण सुधार, जल संरक्षण और सुरक्षा संबंधी कार्य पूरे कराए जाएंगे।

CBA Policy-2022 के अनुसार खनन के बाद पुनः प्राप्त (Reclaimed) भूमि का उपयोग परियोजना प्रभावित परिवारों के हित में किया जा सकता है। ऐसी भूमि पर पुनर्वास कॉलोनियां, अस्पताल, विद्यालय, कौशल विकास केंद्र, जल संरक्षण परियोजनाएं, वृक्षारोपण तथा स्थानीय रोजगार सृजन से जुड़े कार्य विकसित किए जा सकते हैं।

प्रभावित लोग उठा सकते हैं ये प्रमुख मांगें

Mining Plan एवं Mine Closure Plan को सार्वजनिक किया जाए।

ग्राम सभा और स्थानीय समुदाय से पूर्व परामर्श अनिवार्य किया जाए।

Mine Closure Fund/Escrow Fund के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

पुनः प्राप्त भूमि का उपयोग प्रभावित परिवारों, सहकारी समितियों और स्थानीय आजीविका परियोजनाओं के लिए किया जाए।

स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं कौशल विकास में प्राथमिकता मिले।

भूमि पुनर्वास और पर्यावरणीय कार्यों का सोशल ऑडिट कराया जाए।

Mine Closure Monitoring में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रभावित लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि एसईसीएल सहित अन्य कोयला परियोजनाओं में यदि इन प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाता है तो खदान प्रभावित लोगों को केवल मुआवजा ही नहीं, बल्कि स्थायी विकास, सम्मानजनक आजीविका और भविष्य की सुरक्षा भी मिल सकेगी।

अब जरूरत है कि प्रभावित परिवार अपने वैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होकर Mining Plan और Mine Closure Plan की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।