राख से घुट रही जिंदगी: खेत, तालाब और बस्तियां फ्लाई ऐश की चपेट में, जवाबदेही पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने जताई पर्यावरण और स्वास्थ्य की चिंता, फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक प्रबंधन व प्रभावी कार्रवाई की मांग

कोरबा। ऊर्जा नगरी कोरबा में फ्लाई ऐश (राखड़) की समस्या एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। जिले के कई गांवों और बस्तियों में सड़क, खेत, जलस्रोत और रिहायशी इलाकों तक राख पहुंचने से स्थानीय लोगों ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर चिंता जताई है।

ग्रामीणों का कहना है कि समस्या वर्षों से बनी हुई है, लेकिन अपेक्षित समाधान अब तक नजर नहीं आया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर फ्लाई ऐश का डंपिंग और परिवहन होने से सड़क किनारे राख उड़ती रहती है। तेज हवा के दौरान राख का गुबार घरों तक पहुंच जाता है, जिससे लोगों को सांस लेने और दैनिक जीवन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसानों का भी कहना है कि राख खेतों की उर्वरता और जलस्रोतों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।

तालाबों में राख डालने के आरोप
ग्रामीणों ने पूर्व में ऐसे मामलों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है, जिनमें ग्राम बरीडीह के मनरेगा निर्मित तालाब और नोनबिर्रा क्षेत्र के डोड़की तालाब में फ्लाई ऐश डाले जाने की शिकायतें सामने आई थीं। उनका कहना है कि इन मामलों में जांच और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सकी है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर चिंता
राखड़ डेम और फ्लाई ऐश परिवहन मार्गों के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि धूल के कारण बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों को सबसे अधिक परेशानी होती है। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

जवाबदेही और समाधान की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि समय-समय पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की ओर से आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। लोगों ने फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक प्रबंधन, अवैध डंपिंग पर प्रभावी रोक, पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी समान रूप से आवश्यक है।

उनका मानना है कि स्वच्छ हवा, सुरक्षित जलस्रोत और प्रदूषण मुक्त वातावरण प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, जिसके लिए प्रभावी और दीर्घकालिक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।