सहकारिता सप्ताह में लघु वनोपज संग्राहकों को योजनाओं से जोड़ने चला जागरूकता अभियान

कटघोरा जिला यूनियन ने एमएसपी, वन धन, डिजिटल साक्षरता और मूल्य संवर्धन पर दिया प्रशिक्षण, पर्यावरण संरक्षण का भी दिलाया संकल्प

कोरबा।जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित कटघोरा द्वारा 29 जून से 6 जुलाई तक सहकारिता सप्ताह के तहत व्यापक जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान चलाया गया। कार्यक्रम के दौरान पोड़ी, चैतमा, पसान, जटगा और छुरी क्लस्टरों में संग्राहकों, स्व-सहायता समूहों तथा समिति प्रतिनिधियों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन प्रबंध संचालक कुमार निशांत (भा.व.से.) के निर्देशन एवं नोडल अधिकारी अश्वनी कुमार मिश्रा, उप प्रबंध संचालक की उपस्थिति में हुआ। इस दौरान एमएसपी फॉर एमएफपी योजना के तहत लघु वनोपज का निर्धारित मानकों के अनुसार संग्रहण तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विक्रय के लाभों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इससे संग्राहकों को उचित मूल्य मिलने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

प्रबंधकों एवं फड़ मुंशियों को अधिक से अधिक हितग्राहियों को योजना से जोड़ने तथा वन धन विकास केंद्रों और प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के लिए गुणवत्तापूर्ण कच्चा माल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

प्रशिक्षण में वैज्ञानिक तरीके से लघु वनोपज संग्रहण, सुखाई, साफ-सफाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग के माध्यम से बेहतर गुणवत्ता एवं अधिक आय प्राप्त करने के उपाय भी बताए गए। साथ ही मूल्य संवर्धन के माध्यम से अतिरिक्त रोजगार एवं आय के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देते हुए प्रतिभागियों को मोबाइल फोन के उपयोग, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन जानकारी प्राप्त करने और सरकारी योजनाओं का लाभ डिजिटल माध्यम से लेने के लिए प्रेरित किया गया। महुआ प्रसंस्करण केंद्र स्थापित कर महुआ से बिस्कुट, लड्डू, अचार सहित अन्य उत्पाद तैयार करने तथा स्व-सहायता समूहों की आय बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जानकारी दी गई। वन धन एवं एमएसपी योजना के सफल हितग्राहियों ने अपने अनुभव साझा कर अन्य सदस्यों को प्रेरित किया।

सहकारिता सप्ताह के दौरान पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से आंवला, नीम, जामुन और कटहल सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण भी किया गया।

अधिकारियों एवं प्रतिभागियों ने पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प लेते हुए लघु वनोपज आधारित आजीविका को सशक्त बनाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।