कोरबा। कोरबा जिले के बहुचर्चित सर्राफा कारोबारी एवं अमृता ज्वेलर्स के संचालक गोपाल राय सोनी हत्याकांड में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है।
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश गरिमा शर्मा ने मामले में दोषी पाए गए आकाश पुरी, सूरज पुरी और मोहन मिंज को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक टीकम साव ने मामले में प्रभावी पैरवी की।

हत्या समेत कई धाराओं में दोषसिद्धि
न्यायालय ने तीनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। हत्या के अपराध में धारा 103(1) सहपठित धारा 3(5) बीएनएस के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा लूट, साक्ष्य छिपाने और अन्य अपराधों में भी अलग-अलग अवधियों का सश्रम कारावास एवं अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
19 मिनट में अंजाम दी थी वारदात
5 जनवरी 2025 की रात लालूराम कॉलोनी स्थित घर में गोपाल राय सोनी और उनकी अस्वस्थ पत्नी मौजूद थे। रात लगभग 9:40 से 9:59 बजे के बीच तीनों आरोपियों ने घर में घुसकर गोपाल सोनी की निर्मम हत्या कर दी। इसके बाद उनकी क्रेटा कार, सूटकेस और मोबाइल लेकर फरार हो गए।
सीसीटीवी और वैज्ञानिक जांच से खुला राज
तत्कालीन आईजी डॉ. संजीव शुक्ला के पर्यवेक्षण और एसपी सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में गठित विशेष जांच टीम ने 360 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। वारदात के बाद आरोपियों द्वारा इस्तेमाल की गई कार, खून के निशान, घायल आरोपी और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। फरार आरोपी सूरज पुरी को मुंबई से गिरफ्तार किया गया।
दुकान में चोरी की थी साजिश
पुलिस जांच में सामने आया कि गोपाल सोनी के पूर्व चालक सूरज और वर्तमान चालक आकाश को जानकारी थी कि दुकान की चाबी घर में रखे सूटकेस में रहती है। दोनों ने कर्ज चुकाने के लिए दुकान में चोरी की योजना बनाई और आदतन अपराधी मोहन मिंज को भी इसमें शामिल किया। घटना से एक सप्ताह पहले भी वे चाबी हासिल करने घर पहुंचे थे, लेकिन मौका नहीं मिलने पर लौट गए थे।
पहचान उजागर होने पर कर दी हत्या
वारदात की रात तीनों आरोपी दीवार फांदकर घर में घुसे और अलग-अलग स्थानों पर छिप गए। मंदिर के पास छिपे सूरज को गोपाल राय सोनी ने पहचान लिया। पहचान उजागर होने के डर से तीनों ने मिलकर धारदार हथियार से उन पर हमला कर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी सूटकेस लेकर फरार हो गए और रास्ते में हथियार व सूटकेस नदी में फेंक दिए, जिन्हें बाद में गोताखोरों की मदद से बरामद किया गया।
यह फैसला कोरबा के चर्चित हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
Editor – Niraj Jaiswal
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