108 कलशों से हुआ भगवान जगन्नाथ का महास्नान, अनासार काल में रहेंगे महाप्रभु

पुरी की परंपरा के अनुरूप गोकुलनगर मंदिर में विशेष अनुष्ठान, रथयात्रा की तैयारियां शुरू

कोरबा। ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी गोकुलनगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा एवं सुदर्शन चक्र का महास्नान कराया गया। पुरी की परंपरा का पालन करते हुए 108 कलशों के पवित्र जल से महाप्रभु का अभिषेक किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से गुलजार रहा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं और अगले पंद्रह दिनों तक अनासार काल में रहते हैं। इस अवधि में भगवान का सार्वजनिक दर्शन एवं नियमित पूजा-अर्चना स्थगित रहती है।

महाप्रभु को आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार दिया जाता है।

मंदिर समिति के अनुसार महास्नान में उपयोग किए गए जल में 22 प्रकार की जड़ी-बूटियां और औषधियां मिश्रित की गई थीं। यह परंपरा भगवान के स्वास्थ्य लाभ और धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है।

16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा
रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत देव स्नान पूर्णिमा के साथ हो गई है। आगामी 14 जुलाई को नेत्र उत्सव का आयोजन होगा, जबकि 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। महाप्रभु नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहेंगे।

इसके बाद 20 जुलाई को हेरापंचमी, 24 जुलाई को बहुड़ा यात्रा, 25 जुलाई को हरिशयन एकादशी एवं स्वर्ण वेश दर्शन, 26 जुलाई को अधरपणा और 27 जुलाई को नीलाद्री विजय उत्सव के साथ महाप्रभु पुनः मंदिर में प्रवेश करेंगे।

महास्नान उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर भगवान जगन्नाथ से सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की। आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।