सामाजिक बहिष्कार मामले में कोर्ट सख्त, बंजारा समाज के चार पदाधिकारियों पर एफआईआर के निर्देश

दंपति से लाखों रुपये वसूलने और समाज से बहिष्कृत करने का आरोप, तीन दिन में मामला दर्ज करने के निर्देश

कोरबा। सामाजिक बहिष्कार और कथित रूप से लाखों रुपये की अवैध वसूली के मामले में न्यायालय ने बंजारा समाज के चार पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने सिविल लाइन थाना रामपुर को निर्देशित किया है कि तीन दिनों के भीतर संबंधित आरोपियों के विरुद्ध अपराध दर्ज कर निष्पक्ष जांच शुरू की जाए।

मामला एक दंपति से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2022 में आर्य समाज मंदिर रायपुर में विवाह किया था। विवाह के बाद समाज के कुछ पदाधिकारियों ने एक ही गोत्र में विवाह का आरोप लगाते हुए दंपति और उनके परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि समाज में पुनः शामिल करने के नाम पर पहले 11-11 हजार रुपये और बाद में लाखों रुपये की मांग की गई।

परिवाद के अनुसार समाज के तत्कालीन अध्यक्ष और सचिव ने दंपति को समाज में शामिल करने के लिए दो लाख रुपये की मांग की, जिसमें से एक लाख रुपये से अधिक की राशि भी ली गई। इसके बाद भी समाज में शामिल नहीं किया गया और अतिरिक्त तीन लाख रुपये की मांग की जाती रही। बाद में समाज के नए पदाधिकारियों से भी गुहार लगाने पर कोई राहत नहीं मिली।

पीड़ित ने पहले सिविल लाइन थाना और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली। मामले की पैरवी युवा अधिवक्ता प्रिंस अग्रवाल ने की।

थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी कोर्ट की टिप्पणी
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत मिलने के बावजूद थाना स्तर पर समुचित कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया पुलिस द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती गई, जिससे मामले में संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई।

तीन दिन में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश
न्यायालय ने बंजारा समाज के चार वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने का आदेश दिया है।

साथ ही निष्पक्ष जांच कर अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह मामला सामाजिक बहिष्कार, कथित आर्थिक शोषण और न्यायिक हस्तक्षेप के कारण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।