15 जून को कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे भूविस्थापित किसान

रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास समेत 17 सूत्रीय मांगों को लेकर हजारों ग्रामीण होंगे शामिल

कोरबा। एसईसीएल की कुसमुंडा, गेवरा, दीपका और कोरबा परियोजनाओं से प्रभावित हजारों भूविस्थापित किसान 15 जून को कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।

विभिन्न भूविस्थापित संगठनों और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से 17 सूत्रीय मांगपत्र सौंपते हुए आंदोलन की घोषणा की है।

किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के वर्षों बाद भी रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास, फसल क्षतिपूर्ति, परिसंपत्तियों के मूल्यांकन और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई मामले लंबित हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि मानिकपुर, बुड़बुड़, सरायपाली, अंबिका, करतली, सिंघाली, बलगी, सुराकछार और ढेलवाडीह सहित कई क्षेत्रों की भूमि कोयला उत्खनन के लिए अधिग्रहित की गई, लेकिन प्रभावित परिवारों को उनका हक अब तक नहीं मिला। उनका आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से एसईसीएल प्रबंधन समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है, जबकि उत्खनन कार्य लगातार जारी है।

आंदोलन दबाने के लिए फर्जी मामलों का आरोप
भूविस्थापितों ने आरोप लगाया है कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले ग्रामीणों पर फर्जी आपराधिक प्रकरण दर्ज कराए जा रहे हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में ऐसे लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनका घटना से कोई संबंध नहीं था। किसानों ने इसे आंदोलन को दबाने का प्रयास बताया है।

पुराने रोजगार प्रकरण आज भी अधर में
ग्रामीणों का कहना है कि 30 से 40 वर्ष पहले अधिग्रहित भूमि के बदले रोजगार पाने के लिए सैकड़ों परिवार आज भी भटक रहे हैं। कई मामलों में न्यायालय के आदेश के बावजूद रोजगार नहीं दिया गया है। किसानों ने आरोप लगाया कि शासन के निर्देशों के विपरीत कई खातों को जोड़कर एक ही रोजगार दिया गया, जिससे प्रभावित परिवारों को नुकसान हुआ।

मुआवजा और पुनर्वास में भेदभाव का आरोप
भूविस्थापितों ने पुनर्वास राशि वितरण में भेदभाव का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुसमुंडा, गेवरा और दीपका क्षेत्रों में पुनर्वास के लिए 6 लाख रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि कोरबा क्षेत्र में केवल 3 लाख रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने इस व्यवस्था को अन्यायपूर्ण बताते हुए समान पुनर्वास नीति लागू करने की मांग की है।

ड्रोन सर्वे और परिसंपत्ति मूल्यांकन पर आपत्ति
ग्रामीणों ने ड्रोन सर्वे के आधार पर परिसंपत्तियों की स्थिति तय करने का विरोध किया है। उनका कहना है कि पुनर्वास की समयसीमा तय नहीं होने के बावजूद संपत्तियों को फ्रीज कर दिया जाता है, जिससे भविष्य में मकान विस्तार या सुधार करने पर नुकसान उठाना पड़ता है। साथ ही परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में तकनीकी मानकों की अनदेखी और अनियमितताओं का भी आरोप लगाया गया है।

संयुक्त मोर्चे के बैनर तले होगा आंदोलन
इस बार कलेक्टर कार्यालय घेराव का आयोजन जिले के विभिन्न भूविस्थापित और किसान संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। आयोजकों का दावा है कि चारों परियोजनाओं से प्रभावित हजारों किसान और ग्रामीण इस आंदोलन में शामिल होंगे। उनका कहना है कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।