जल संरक्षण बन रहा जन आंदोलन: ‘मोर गांव, मोर तरिया, मोर गांव मोर पानी’ अभियान से 25 हजार से अधिक ग्रामीणों को रोजगार

कोरबा।जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से संचालित “मोर गांव, मोर तरिया” एवं “मोर गांव, मोर पानी” अभियान ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधन संवर्धन की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहे हैं।

इन अभियानों के जरिए जहां जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं हजारों ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग के मार्गदर्शन में जिलेभर में मानसून पूर्व जल संरक्षण संबंधी कार्यों को प्राथमिकता के साथ कराया जा रहा है। वर्षा जल के अधिकतम संचयन के लिए जल संरचनाओं के निर्माण, मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य तेज गति से चल रहे हैं।

अभियान के तहत नवा तरिया निर्माण, कृषि तालाब, आजीविका डबरी, परकोलेशन टैंक, मेड़बंधान, नाला उपचार और जल निकासी संरचनाओं का व्यापक स्तर पर विकास किया जा रहा है। इन कार्यों का उद्देश्य वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल स्तर बढ़ाना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से तालाबों का गहरीकरण, डबरी निर्माण, स्टॉप डेम और परकोलेशन टैंक जैसे कार्य किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य की जल आवश्यकताओं को सुरक्षित किया जा सके।

1500 से अधिक कार्यों पर चल रहा काम
प्रशासन के अनुसार जिले में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े 1500 से अधिक कार्य प्रगति पर हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन 25 हजार से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। गांव में ही रोजगार मिलने से पलायन पर भी प्रभावी नियंत्रण हुआ है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत संचालित यह अभियान जल सुरक्षा के साथ-साथ आजीविका सुरक्षा का भी मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को गांव में ही रोजगार मिले और जल संरक्षण के जरिए आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।