कोरबा।छत्तीसगढ़ को बिजली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर और पावर सरप्लस राज्य माना जाता है, लेकिन भीषण गर्मी के दौरान सामने आए लाइव आंकड़ों ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में तापमान 45 डिग्री तक पहुंचने के दौरान बिजली की मांग रिकॉर्ड 5921 मेगावाट तक जा पहुंची, लेकिन सरकारी पावर प्लांट जरूरत के मुताबिक उत्पादन नहीं कर सके।
सरकारी प्लांटों का उत्पादन केवल 71 प्रतिशत
राज्य के सरकारी ताप विद्युत संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता 2960 मेगावाट है, लेकिन उस समय केवल 2107 मेगावाट यानी करीब 71 प्रतिशत बिजली उत्पादन ही हो सका।
मड़वा प्लांट ने संभाली बागडोर
इस संकट के बीच जांजगीर के पास स्थित 1000 मेगावाट क्षमता वाले मड़वा पावर प्लांट ने 95 प्रतिशत लोड पर 951 मेगावाट बिजली उत्पादन कर सिस्टम को संभालने में अहम भूमिका निभाई।
कोरबा वेस्ट की दो यूनिट बंद, उत्पादन शून्य
वहीं 1340 मेगावाट क्षमता वाले कोरबा वेस्ट की दो इकाइयां बंद रहने से वहां उत्पादन पूरी तरह शून्य रहा। हसदेव बांगो हाइड्रो पावर स्टेशन की स्थिति भी चिंताजनक रही, जहां पीक आवर में भी उत्पादन शून्य दर्ज किया गया।
महंगी दरों पर खरीदनी पड़ी बिजली
सरकारी उत्पादन में कमी के कारण राज्य को 3395 मेगावाट बिजली निजी कंपनियों और केंद्रीय पूल से महंगी दरों पर खरीदनी पड़ी। इससे भविष्य में उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
तीन दशक पुरानी यूनिटों में समस्या
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि कोरबा वेस्ट की 210 मेगावाट क्षमता वाली इकाइयां लगभग तीन दशक पुरानी हो चुकी हैं। समय पर ओवरहॉलिंग नहीं होने से बॉयलर ट्यूब लीकेज और टरबाइन वाइब्रेशन जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
कोयले में 40 प्रतिशत से अधिक ऐश कंटेंट
विशेषज्ञों के अनुसार मड़वा प्लांट को छोड़कर अधिकांश सरकारी संयंत्रों को मिलने वाले कोयले में राख की मात्रा 40 प्रतिशत से अधिक है, जिससे यूनिट बार-बार ट्रिप हो रही हैं।
हाइड्रो पावर स्टेशन पर सवाल
120 मेगावाट क्षमता वाले हसदेव बांगो हाइड्रो पावर स्टेशन का पीक आवर में भी बंद रहना प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मड़वा प्लांट का विस्तार अटका
मड़वा पावर प्लांट वर्तमान में करीब 1000 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है, जिसमें से लगभग 50 मेगावाट बिजली प्लांट के आंतरिक उपयोग में खर्च होती है, जबकि 951 मेगावाट सीधे ग्रिड को सप्लाई की जा रही है। प्लांट की प्रस्तावित 500 मेगावाट की नई यूनिट का मामला फिलहाल मुख्यालय स्तर पर लंबित बताया जा रहा है।
पुराने प्लांटों का खराब रखरखाव चिंता का विषय
एक ओर जहां मड़वा और निजी कंपनियों के संयंत्र बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं पुराने सरकारी प्लांटों का खराब रखरखाव और उत्पादन में गिरावट भीषण गर्मी के बीच उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है।
Editor – Niraj Jaiswal
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