भारत की आत्मा गांवों में बसती है। गांव केवल खेती-किसानी का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की नींव हैं। आज जब देश तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है, तब गांवों का सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, बिजली, पानी और इंटरनेट जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। युवाओं का शहरों की ओर पलायन लगातार बढ़ रहा है। खेती पर निर्भरता अधिक होने के बावजूद किसानों को आधुनिक तकनीक और उचित मूल्य का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
लेकिन उम्मीद की नई किरण भी दिख रही है
डिजिटल इंडिया अभियान ने गांवों तक इंटरनेट पहुंचाया है। स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। ग्रामीण युवा अब ऑनलाइन शिक्षा ले रहे हैं, छोटे उद्योग चला रहे हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
क्या करना चाहिए?
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा दें।
स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करें।
कृषि आधारित उद्योग, डेयरी, मत्स्य पालन और हस्तशिल्प को प्रोत्साहन दें।
पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और जैविक खेती पर ध्यान दें।
वैश्विक तनाव (ईरान-अमेरिका-इजराइल) के कारण महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का असर गांवों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में आत्मनिर्भर गांव और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था तैयार करना समय की मांग है।
डॉ. अलका यादव ने कहा कि गांवों को केवल सहायता का केंद्र नहीं, बल्कि विकास और नवाचार का केंद्र बनाना होगा। सरकार, समाज और युवाओं के संयुक्त प्रयास से ही हम सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकते हैं।
गांवों का विकास केवल आर्थिक उन्नति नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय समृद्धि का मार्ग है। जब गांव आगे बढ़ेंगे, तभी भारत विश्व पटल पर और मजबूती से खड़ा हो सकेगा।
Editor – Niraj Jaiswal
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