31 करोड़ के संजय नगर अंडरपास पर ब्रेक, रेलवे की सुस्ती से अटका निर्माण कार्य

मुआवजा वितरण और कब्जे हटाने के बाद भी शुरू नहीं हो पाया काम, रोज जाम से जूझ रहे लोग

कोरबा। कोरबा शहर की यातायात समस्या को दूर करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और रेलवे की साझेदारी में प्रस्तावित संजय नगर अंडरपास परियोजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। लगभग 31 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे क्रॉसिंग पर बनने वाले इस अंडरपास का कार्य रेलवे की धीमी कार्यप्रणाली के कारण अटका हुआ है।

भाजपा सरकार के गठन के बाद इस परियोजना को लेकर सक्रियता दिखाई गई थी और आगे की प्रक्रिया भी शुरू की गई। निर्माण क्षेत्र में आने वाले प्रभावितों को मुआवजा वितरित कर अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

बताया जा रहा है कि रेलवे की ओर से पोल और केबल शिफ्टिंग का काम लंबित होने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।

संजय नगर रेलवे क्रॉसिंग कोरबा शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। यहां दिनभर यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही के कारण फाटक बार-बार बंद करना पड़ता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

वैकल्पिक मार्गों की कमी और लगातार लगने वाले जाम से आम नागरिक लंबे समय से परेशान हैं।

करीब दो वर्ष पहले प्रशासन की पहल पर रेलवे ने अंडरपास निर्माण को सैद्धांतिक सहमति दी थी। शर्त यह रखी गई थी कि परियोजना की कुल लागत का 50 प्रतिशत रेलवे और शेष राशि प्रशासन वहन करेगा।

निर्माण कार्य के लिए छत्तीसगढ़ सेतु निगम को एजेंसी बनाया गया और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। दुर्ग जिले की एक निर्माण एजेंसी को कार्य मिला, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हो सका।

राज्य सरकार की ओर से परियोजना को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नवंबर 2025 तक सभी बाधाओं को दूर कर निर्माण शुरू करने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन रेलवे की ओर से आवश्यक तकनीकी कार्यों में देरी के कारण मामला अटक गया। सेतु निगम के अधिकारियों ने रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर से मुलाकात कर कई बार पत्राचार भी किया, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं हो सकी है।

कोरबा में रेलवे फाटक लंबे समय से आम जनता के लिए बड़ी समस्या बने हुए हैं। कोयला परिवहन के कारण मालगाड़ियों की लगातार आवाजाही से फाटक बार-बार बंद होते हैं, जिससे घंटों जाम की स्थिति बन जाती है। इसका असर न केवल आम लोगों पर पड़ता है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों और लोको पायलटों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।