कोरबा। शहरी निकाय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण निकाय क्षेत्रांतर्गत ऐसे वेस्ट बल्क जनरेटर जो भारी मात्रा में कचरे का उत्सर्जन करते हैं एवं उनकी इकाइयां निर्धारित मानदंडों के अंतर्गत आती हैं, उनकी अपने यहां उत्सर्जित कचरे के समुचित प्रबंधन व निपटान की जवाबदारी अपनी स्वयं की है। उन्हें कचरे के प्रबंधन हेतु अपनी इकाइयों/संस्थानों में अनिवार्य रूप से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होगी।
नए नियम ग्रामीण निकायों पर भी लागू
नगर पालिक निगम कोरबा के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा इस वर्ष उत्सर्जित कचरे के प्रबंधन पर जो निर्देश जारी किए गए हैं, वे शहरी निकाय के साथ-साथ ग्रामीण स्थानीय निकाय पर भी लागू होंगे।
ये क्षेत्र होंगे इसके दायरे में
उक्तानुसार सरकारी और निजी क्षेत्र या लोक निजी भागीदारी में, विशेष अधिसूचित क्षेत्र, अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र या टाउनशिप, विशेष आर्थिक जोन, फूड पार्क, भारतीय रेलवे के नियंत्रण वाले क्षेत्र (जिनमें रेलवे स्टेशन, रेलवे ट्रैक और रेलवे ट्रैक से सटे भूमि खंड सम्मिलित हैं), हवाई अड्डे, एयरबेस, पत्तन और विमान पत्तन सम्मिलित हैं।
20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले भवन
प्रतिदिन 40 हजार लीटर पानी की खपत
प्रतिदिन 100 किलोग्राम ठोस अपशिष्ट का उत्सर्जन
बल्क वेस्ट जनरेटरों के लिए नए मानदंड
उन्होंने बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 में बल्क वेस्ट जनरेटरों को नये सिरे से चिन्हाकित किया गया है, जिसके अनुसार भारी मात्रा में अपशिष्ट जनरेट करने वाली वे इकाइयां जो इन मानदंडों में से कम से कम एक को पूरा करती हैं:
डस्टबिन रखना होगा अनिवार्य
सभी संस्थानों को आवश्यकतानुसार डस्टबिन रखना जरूरी होगा। अनियमितता और मनमानी पर कार्रवाई की जाएगी।
Editor – Niraj Jaiswal
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