कोरबा। जिले में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण ने अब गंभीर रूप ले लिया है। औद्योगिक गतिविधियों और अनियंत्रित उत्सर्जन के कारण वातावरण में धूल और जहरीले कणों की मात्रा बढ़ती जा रही है, जिसका सीधा असर आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। विशेष रूप से अस्थमा, एलर्जी और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिससे स्वास्थ्य तंत्र पर भी अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
ऊर्जा नगरी में प्रदूषण की समस्या बनी चिंता का विषय
कोरबा को ऊर्जा नगरी के रूप में जाना जाता है, जहां स्थित बिजली घरों से निकलने वाले धुएं और राख (फ्लाई ऐश) का प्रभाव लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। इसके साथ ही सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ते भारी वाहनों से उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण को और बढ़ा रही है।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब उपनगरीय और स्लम क्षेत्रों में लोग अब भी कोयले से चलने वाली सिगड़ियों का उपयोग कर रहे हैं, जिनसे निकलने वाला धुआं घरों और आसपास के वातावरण को प्रदूषित कर रहा है।
ठोस कार्ययोजना का नहीं दिख रहा असर
इन सभी कारणों से कोरबा में वायु गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है, लेकिन इसके समाधान के लिए ठोस और व्यापक कार्ययोजना अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। एक ओर जहां शहर और जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदूषण से जूझ रहे लोगों को राहत देने के लिए प्रभावी कदमों की कमी साफ दिखाई देती है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
इसी बीच बुधवार को विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर कोरबा में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और प्रदूषण से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासन, उद्योगों और आम नागरिकों को मिलकर प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस रणनीति और सख्त अमल सुनिश्चित करना होगा, तभी कोरबा के लोगों को इस बढ़ते खतरे से राहत मिल सकेगी।
सतर्क रहने की है जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह की स्थितियां जिले में बनी हुई हैं, उसे लेकर जन सामान्य को अपने स्तर पर सतर्क रहने की आवश्यकता है। चुनौतियों के बीच उन्हें अपनी जिंदगी पर भी ध्यान रखना है। प्रदूषण के खतरों को लेकर बचाव के तौर-तरीके अपनाने की मानसिकता बनानी होगी।
पूर्व अध्यक्ष नीमा डॉ. आरसी पांडेय ने कहा कि प्रदूषण के खतरों को लेकर लोगों को स्वयं सतर्क रहने और बचाव के उपाय अपनाने की जरूरत है।
Editor – Niraj Jaiswal
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