कोरबा।जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड स्थित कोरबी धान खरीदी केंद्र के प्रबंधक ने तनाव में आकर जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। समय पर धान का उठाव नहीं होने और करीब 1000 क्विंटल शॉर्टेज की स्थिति बनने से वह मानसिक दबाव में था। परिजनों की सतर्कता से समय पर उपचार मिलने पर उसकी जान बच गई।
जानकारी के अनुसार, कोरबी खरीदी केंद्र में वर्ष 2025-26 के दौरान प्रबंधक राजेंद्र विंध्यराज की देखरेख में आसपास के किसानों से धान खरीदी की गई थी। यह केंद्र क्षेत्र का बड़ा उपार्जन केंद्र माना जाता है, जहां 15 नवंबर से 31 जनवरी तक खरीदी हुई।
बताया जा रहा है कि खरीदी के दौरान धान के उठाव में लगातार देरी होती रही। मिलर्स द्वारा समय पर उठाव नहीं किया गया और मार्कफेड की ओर से भी आवश्यक दबाव नहीं बनाया गया, जिससे केंद्र में धान का स्टॉक जमा होता गया। कई बार समस्या से अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं निकल सका।
खरीदी सीजन समाप्त होने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। मौसम के प्रभाव और सूखत के कारण धान में शॉर्टेज की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिससे प्रबंधक और स्टाफ पर जिम्मेदारी का दबाव बढ़ गया। इसके साथ ही शत-प्रतिशत उठाव नहीं होने से भुगतान भी प्रभावित हुआ, जिससे आर्थिक संकट की स्थिति बन गई।
इन्हीं परिस्थितियों से परेशान होकर प्रबंधक ने जहर खा लिया। परिजनों के अनुसार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और उल्टी होने लगी, जिसके बाद उन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें कटघोरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर धान खरीदी व्यवस्था, उठाव प्रणाली और मार्कफेड की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं अधिकारियों में भी इस मामले को लेकर चिंता का माहौल है।
Editor – Niraj Jaiswal
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