दिव्यांग सूरज कुमार के जीवन में आई नई रोशनी,मोट्राईज़्ड ट्राईसाइकिल ने दी आत्मनिर्भरता की उड़ान

कोरबा। नगर पालिका निगम क्षेत्र के सेमीपाली-जमनीपाली निवासी 32 वर्षीय श्री सूरज कुमार जन्म से ही 100 प्रतिशत अस्थि-बाधित दिव्यांग हैं। दो पैरों से पूर्णतः दिव्यांग होने के कारण उनका हर दिन संघर्ष और तकलीफों से भरा था। चलना-फिरना, दैनिक कार्य करना, बाहर जाना हर कदम पर मुश्किलें उनका जीवन बोझिल बना देती थीं। फिर भी जीवन को आगे बढ़ाने की उनकी इच्छाशक्ति कभी कमजोर नहीं हुई।

बेहतर सहारे की तलाश में 14 मार्च 2026 को वे लोक अदालत में उपस्थित हुए और मोट्राईज्ड ट्राईसाइकिल की मांग रखी। छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग ने उनकी आवश्यकता को गंभीरता से लिया और त्वरित कार्रवाई करते हुए सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत उसी दिन मोट्राईज्ड ट्राईसाइकिल स्वीकृत कर प्रदान की। यह महत्वपूर्ण सहयोग उप-संचालक एवं श्रीमती भुनेश्वरी तिवारी (एम.आर.ए.) द्वारा निःशुल्क दिया गया।

मोट्राईज्ड ट्राईसाइकिल जैसे ही सूरज कुमार को मिली, उनके जीवन में मानो नई रोशनी फैल गई। पहले जहां हर कदम संघर्ष था, वहीं अब गतिशीलता, आत्मविश्वास और उत्साह का नया अध्याय शुरू हुआ। ट्राईसाइकिल मिलने के बाद उनकी मुस्कान और जीवन की चमक सब कुछ बयां कर रही थी। स्वयं सूरज कुमार के शब्दों में, “अब मैं मोट्राईज्ड ट्राईसाइकिल की मदद से अपने रोजमर्रा के काम आसानी से कर सकूंगा। स्व-रोजगार कर आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्य धारा से जुड़कर जीवन जी सकूंगा।”

आज सूरज कुमार अपनी नई ट्राईसाइकिल के साथ न केवल स्वतंत्र रूप से चल-फिर पा रहे हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। यह सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि उनके जीवन में आत्मसम्मान, संभावना और नई शुरुआत का प्रतीक बन गया है।