कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की गेवरा खदान नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने की तैयारी में है।
कंपनी का लक्ष्य इस खदान से 63 मिलियन टन (6.3 करोड़ टन) कोयला उत्पादन करना है, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी एकल-साइट कोयला उत्पादक खदान बना देगा।
एसईसीएल के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर हरीश दुहन ने हाल ही में पुष्टि की है कि अगले साल तक गेवरा अकेले 63 मिलियन टन उत्पादन कर अमेरिका की ब्लैक थंडर माइन को पीछे छोड़ देगी।
वर्तमान में गेवरा भारत की सबसे बड़ी ओपनकास्ट कोयला खदान है, जो 1981 से संचालित हो रही है। चालू वित्तीय वर्ष में इसका उत्पादन लक्ष्य 56 मिलियन टन है, जो संभवतः हासिल हो जाएगा। पिछले वर्षों में उत्पादन क्रमशः बढ़ता रहा है—2023-24 में 59.11 मिलियन टन, जबकि 2024-25 में भी लगभग 56 मिलियन टन के आसपास रहा। हालांकि, 63 मिलियन टन के लक्ष्य से पिछली बार थोड़ा पीछे रहा था, लेकिन अब सभी संसाधन जैसे जमीन, मशीनरी, मैनपावर और ग्राहक उपलब्ध होने से प्रबंधन आश्वस्त है।
एसईसीएल ने पहले ही पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त कर ली है, जिससे खदान की क्षमता को 70 मिलियन टन प्रति वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा। यह विस्तार भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।
यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय होगी, क्योंकि गेवरा खदान कोल इंडिया की महत्वाकांक्षी योजनाओं का प्रमुख हिस्सा है।
Editor – Niraj Jaiswal
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