कोरबा। कोरबा के निवासी बलराम कुंभकार की सफलता की यह कहानी साबित करती है कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों के लिए वास्तव में वरदान साबित हो रही है। पारंपरिक टेलरिंग (दर्जी) व्यवसाय से जुड़े बलराम ने योजना के तहत मिले प्रशिक्षण, स्टाइपेंड और वित्तीय सहायता से अपने व्यवसाय को नई दिशा और मजबूती दी है।
बलराम ने लाइवलीहुड कॉलेज, कोरबा में टेलर ट्रेड के अंतर्गत 7 दिवसीय बेसिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रशिक्षण के बाद उन्हें शासन की ओर से 4,000 रुपये की स्टाइपेंड राशि मिली। इसके साथ ही व्यवसाय विस्तार के लिए बिना किसी गारंटर के 1 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने अपनी दुकान को आधुनिक सिलाई मशीनों, उपकरणों और बेहतर संसाधनों से लैस किया।
वर्तमान में बलराम 15 दिवसीय एडवांस प्रशिक्षण ले रहे हैं, जहां वे नवीन डिजाइन, आधुनिक मशीनों का संचालन और उन्नत तकनीकों का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। इस एडवांस कोर्स में उन्हें प्रतिदिन 500 रुपये की दर से कुल 7,500 रुपये का स्टाइपेंड और 1,000 रुपये का यात्रा भत्ता प्रदान किया जा रहा है।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद बलराम को योजना के तहत 2 लाख रुपये तक का अतिरिक्त बिना गारंटर ऋण मिलने की संभावना है। बलराम कुंभकार ने कहा, “कौशल प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता ने मेरे जीवन में आत्मनिर्भरता की नई रोशनी जलाई है। अब मैं अपने परिवार को बेहतर तरीके से संभाल सकता हूं और व्यवसाय को और आगे बढ़ा सकता हूं।”
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों, शिल्पकारों और हुनरमंदों को कौशल विकास, टूलकिट सहायता, क्रेडिट सुविधा और बाजार पहुंच प्रदान की जा रही है। कोरबा जिले में बलराम कुंभकार जैसे कई हितग्राहियों को इस योजना का लाभ मिल रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार कर रहा है।
यह कहानी न केवल बलराम की मेहनत की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही योजना और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी पारंपरिक व्यवसाय को आधुनिक और सफल बनाया
Editor – Niraj Jaiswal
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