म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी का पर्दाफाश, उरगा पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में ठगी की रकम ट्रांसफर होती थी खाते से

कोरबा।जिले में साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में उरगा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने म्यूल अकाउंट के माध्यम से साइबर ठगी में संलिप्त एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसके खाते का उपयोग छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में लोगों से ठगी की गई राशि को ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।

पुलिस को भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय (कोऑर्डिनेशन) पोर्टल के माध्यम से संदिग्ध म्यूल अकाउंट की जानकारी प्राप्त हुई थी। तकनीकी जांच में यह सामने आया कि थाना उरगा क्षेत्र के निवासी संजय मिरी (पिता शिवकुमार मिरी, उम्र 36 वर्ष, निवासी बरपाली सतनामीपारा, थाना उरगा, जिला कोरबा) ने अपने नाम से बैंक खाता खुलवाकर उसे साइबर ठगों के हवाले कर दिया था।

जांच में पाया गया कि उक्त खाते का इस्तेमाल विभिन्न राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और वास्तविक अपराधियों की पहचान छिपाने के लिए किया जा रहा था।

पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उरगा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 90/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 61(2) एवं 3(5) के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। यह कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं एसडीओपी के मार्गदर्शन में की गई।

क्या होता है म्यूल अकाउंट
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है, जिसे खाताधारक लालच में आकर साइबर अपराधियों को किराए पर या उपयोग के लिए दे देता है। ठग इस खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर कर आगे भेज देते हैं, जिससे उनकी पहचान छिपी रहती है। यह एक गंभीर और दंडनीय अपराध है, जिसमें शामिल व्यक्ति को भी ठगों के समान सजा का प्रावधान है।

कोरबा पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, ओटीपी या किसी भी प्रकार की बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

बैंक खाता किराए पर देना या किसी को उपयोग करने देना अपराध है।

किसी भी साइबर ठगी की सूचना तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) या नजदीकी पुलिस थाने में दें।