मधुमक्खी पालन से किसानों की आय में बढ़ोतरी, कम लागत में मिला स्वरोजगार का नया विकल्प

कोरबा। जिला कोरबा में राज्य पोषित परागण योजना के तहत मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देकर किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय पहल की जा रही है। इस योजना से विकासखंड पोंड़ी-उपरोड़ा के ग्राम कुटेश्वर, नगोई, बझेरा, सिंघिया एवं जुराली के किसानों की आय में सकारात्मक बदलाव आया है।

पहले केवल धान की खेती पर निर्भर रहने वाले किसान अब मधुमक्खी पालन के माध्यम से कम लागत में अधिक लाभ अर्जित कर रहे हैं। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ी है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को भी स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।

उद्यानिकी अधिकारी पी.एस. सिंह ने बताया कि किसानों को कृषि उद्यान केंद्र कटघोरा एवं शासकीय उद्यान रोपणी में मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद किसानों ने तकनीकी एवं व्यावहारिक ज्ञान के आधार पर मधुमक्खी पालन शुरू किया, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। एक पेटी से सालाना 15 से 25 किलोग्राम शहद का उत्पादन होता है, जबकि 20 पेटियों से किसान एक से दो लाख रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं।

मधुमक्खी पालन से फसलों में परागण बढ़ने के कारण सब्जी, दलहन, तिलहन और फलदार फसलों की पैदावार 15 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। शहद के साथ-साथ मोम, पराग, रॉयल जेली और मधुमक्खी विष की दवा, कॉस्मेटिक एवं आयुर्वेदिक उद्योगों में बढ़ती मांग से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं।

योजना की विशेषता यह है कि इसके लिए बड़ी भूमि की आवश्यकता नहीं होती। किसान घर के आंगन या खेत की मेड़ों पर पेटियां रखकर उत्पादन कर सकते हैं। योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को 45 मधुमक्खी कॉलोनियां एवं पेटियां दी गई हैं। प्रति पेटी 2000 रुपये की लागत में 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 1000 रुपये का अनुदान किसानों को प्रदान किया जा रहा है।